ईडी ने अटैच की रीवा में मौजूद स्कूल, जमीन:एमपी सरकार में सहायक रहे महेंद्र सिंह और परिजनों की 1.64 करोड़ की प्रॉपर्टी हुई है अटैच
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मध्य प्रदेश सरकार में पूर्व सहायक रहे महेंद्र प्रताप सिंह और उनकी पत्नी रीता सिंह की करीब ₹1.64 करोड़ की अचल संपत्ति अस्थायी रूप से अटैच की हैं। आर्थिक अपराध से अर्जित रकम का इस्तेमाल बीमा पॉलिसियों, वाहनों, रीवा जिले में मौजूद जमीन के भूखंडों की खरीद और स्कूल भवन के निर्माण जैसी चल-अचल संपत्तियों में किया गया।
यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट 2002 के तहत की गई है। ईडी भोपाल के अनुसार यह जांच आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW), भोपाल में दर्ज FIR के आधार पर शुरू की गई थी। इस मामले में महेंद्र प्रताप सिंह पर आय के ज्ञात स्रोतों की तुलना में अनुपातहीन संपत्ति रखने का आरोप पाया है। जांच एजेंसी के मुताबिक 13 फरवरी 1995 से 9 सितंबर 2020 तक की जांच अवधि में महेंद्र प्रताप सिंह ने करीब ₹1.64 करोड़ की अनुपातहीन संपत्ति अर्जित की, जो उनकी ज्ञात आय के स्रोतों से लगभग 191.11 प्रतिशत अधिक बताई गई है।
ईडी का कहना है कि इस मामले में आर्थिक अपराध से अर्जित रकम का इस्तेमाल बीमा पॉलिसियों, वाहनों, जमीन के भूखंडों की खरीद और स्कूल भवन के निर्माण जैसी चल-अचल संपत्तियों में किया गया। एजेंसी के अनुसार आरोपी इन संपत्तियों के लिए आय के स्रोतों को पर्याप्त रूप से स्पष्ट नहीं कर सके। रीवा में जमीन और स्कूल भवन भी अटैच ईडी ने पीएमएलए की धारा 5(1) के अंतर्गत एमपी के रीवा जिले में स्थित जमीन के भूखंड और स्कूल भवन समेत करीब ₹1.64 करोड़ की संपत्तियों को अटैच किया है।
ये संपत्तियां कथित तौर पर अपराध से अर्जित आय से जुड़ी हैं। ईडी ने बताया कि मामले में आगे की जांच जारी है। ईओडब्ल्यू की छापेमारी में यह हुआ था खुलासा ईओडब्ल्यू ने महेन्द्र प्रताप सिंह के विरुद्ध सितंबर 2020 में छापेमारी की कार्यवाही में भारी मात्रा में संपत्ति का खुलासा किया था। ईओडब्ल्यू की एफआईआर के अनुसार वर्तमान में मऊगंज जिले के मर्यादपुर में रहने वाले महेंद्र प्रताप सिंह को शासकीय सेवा के दौरान वर्ष 2003 से 2020 की अवधि में ज्ञात स्त्रोतों से कुल राशि रुपए छियालीस लाख अस्सी हजार छः सौ छप्पन रुपए की आय प्राप्त हुई।
इस अवधि में उनका कुल व्यय दो करोड़ अस्सी लाख अन्ठानवें हजार एक सौ पच्चीस रुपये होना पाया है। इन सम्पत्तियों के अतिरिक्त महेंद्र प्रताप सिंह द्वारा अन्य प्लाट एवं वाहन अपने पुत्र- पुत्री की शिक्षा पर किए गए व्यय तथा बैंकों, शेयर तथा बीमा पालिसियों में भी काफी खर्च करने की संभावना पाई गई थी।
महेंद्र प्रताप सिंह के पिता भैया लाल सिंह की मृत्यु होने के पश्चात् वर्ष 1994-95 में जिला रीवा में शिक्षा विभाग में सहायक ग्रेड -3 के पद पर उनकी अनुकम्पा नियुक्ति हुई थी जो विगत कई वर्षों से सहायक ग्रेड-3 के पद पर पहाड़ी संकुल में पदस्थ रहे। पहाड़ी संकुल के अन्तर्गत 150-200 शिक्षक आते हैं जिनके प्राविडेन्ट फण्ड, ग्रेज्युटी के पैसे निकालने, छुट्टी पास कराने से लेकर वेतन वृद्धि लगाने आदि का कार्य महेंद्र प्रताप सिंह द्वारा किया जाता है।
ईओडब्ल्यू की एफआईआर के अनुसार महेन्द्र प्रताप सिंह द्वारा अपने आय के ज्ञात स्त्रोतों से लगभग 600 प्रतिशत अधिक राशि की सम्पत्ति अर्जित की गई।
📡 स्रोत: NewsData.io