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ईएनटी इलाज में तकनीकी बदलाव, जांच से सर्जरी तक बढ़ा आधुनिक तकनीक का दायरा

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 26 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
ईएनटी इलाज में तकनीकी बदलाव, जांच से सर्जरी तक बढ़ा आधुनिक तकनीक का दायरा

जयपुर में IAOHNS की 12वीं कॉन्फ्रेंस में ईएनटी उपचार में एंडोस्कोपिक, रोबोटिक और AI तकनीकों के बढ़ते इस्तेमाल पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने स्कल बेस, कान, नाक, थायरॉयड और हेड-नेक की जटिल बीमारियों में आधुनिक तकनीकों की भूमिका पर विचार साझा किए।

जयपुर, 26 सितंबर । कान, नाक और गले से जुड़ी बीमारियों के निदान और उपचार में आधुनिक तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ रही है। एंडोस्कोपिक सर्जरी से लेकर रोबोटिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक, ईएनटी चिकित्सा में तकनीकी बदलावों पर शनिवार को इंडियन एकेडमी ऑफ ओटोलैरिंगोलॉजी एंड हेड-नेक सर्जरी (IAOHNS) की 12वीं कॉन्फ्रेंस में चर्चा हुई।

एसएमएस अस्पताल के ईएनटी विभाग के वरिष्ठ आचार्य और कॉन्फ्रेंस के साइंटिफिक चेयरमैन डॉ. पवन सिंघल ने बताया कि आधुनिक तकनीक विशेष रूप से उन मामलों में उपयोगी हो रही है, जहां बीमारी शरीर के ऐसे हिस्सों में होती है, जहां सीधे पहुंचना चुनौतीपूर्ण होता है। स्कल बेस, कान, नाक, थायरॉयड और हेड-नेक से जुड़ी जटिल स्थितियों में एंडोस्कोपिक प्रक्रियाओं से उपचार के नए विकल्प सामने आए हैं।

एंडोस्कोपिक सर्जरी से बढ़ी सटीकता

एंडोस्कोपिक सर्जरी में छोटे रास्तों के जरिए प्रभावित हिस्से तक पहुंचकर उपचार किया जाता है। ईएनटी में इसका इस्तेमाल कान की सर्जरी के साथ-साथ स्कल बेस और नाक से जुड़ी विभिन्न प्रक्रियाओं में किया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तकनीक से सर्जनों को प्रभावित हिस्से को बेहतर तरीके से देखने और प्रक्रिया को अधिक सटीकता के साथ करने में मदद मिल सकती है।

रोबोटिक सर्जरी और AI पर भी चर्चा

हेड-नेक क्षेत्र में रोबोटिक सर्जरी को लेकर भी चर्चा हुई। रोबोटिक सिस्टम में बेहतर विजिबिलिटी, उपकरणों की नियंत्रित मूवमेंट और सूक्ष्म कार्यक्षमता जैसे पहलुओं पर जोर दिया जाता है। हालांकि, भारत में ईएनटी और हेड-नेक सर्जरी में रोबोटिक तकनीक का इस्तेमाल अभी सीमित है।

वहीं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) भी ईएनटी चिकित्सा में महत्वपूर्ण विषय बनकर सामने आया है। हेड-नेक कैंसर के निदान, उपचार और मरीजों की देखभाल में AI के संभावित उपयोग को लेकर वैज्ञानिक स्तर पर शोध और चर्चा जारी है।

कान और थायरॉयड सर्जरी में भी बदलाव

कान से जुड़ी बीमारियों के उपचार में एंडोस्कोपिक ईयर सर्जरी, चेहरे की नस से संबंधित सर्जरी, कान के पर्दे की सर्जरी और स्टेपेडोटॉमी जैसी प्रक्रियाओं में आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। न्यूरोटोलॉजी में वर्टिगो, चक्कर और संतुलन संबंधी समस्याओं के मूल्यांकन के लिए भी आधुनिक जांच पद्धतियों पर जोर दिया जा रहा है।

थायरॉयड सर्जरी में ट्रांस-वेस्टिबुलर एंडोस्कोपिक थायरॉयडेक्टॉमी जैसी तकनीक भी चर्चा में रही। इसे ‘स्कारलेस’ थायरॉयड सर्जरी कहा जाता है, क्योंकि इसमें गर्दन पर पारंपरिक चीरा नहीं लगाया जाता।

ईएनटी के भविष्य पर 10 से अधिक सत्र

कॉन्फ्रेंस के सत्रों में ईएनटी चिकित्सा के भविष्य और इसमें होने वाले तकनीकी बदलावों पर चर्चा की गई। दिनभर 10 से अधिक सत्र आयोजित हुए, जिनमें चिकित्सकों और विशेषज्ञों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए।

विशेषज्ञों के अनुसार, ईएनटी चिकित्सा में तकनीक का दायरा अब केवल ऑपरेशन तक सीमित नहीं है। बीमारी की पहचान, सर्जिकल प्लानिंग, उपचार और फॉलो-अप केयर तक तकनीकी नवाचारों की भूमिका बढ़ रही है। हालांकि, किसी भी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल मरीज की स्थिति, चिकित्सकीय आवश्यकता और विशेषज्ञ की सलाह के आधार पर किया जाना जरूरी है।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।