अपराध

IIT बॉम्बे- नकल करते पकड़े जाने पर सीधे कार्रवाई नहीं:पहले छात्र का पक्ष सुनेंगे; नया ड्राफ्ट तैयार, साहिल सुसाइड केस के बाद फैसला

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 8 अक्टूबर 2026 👁️ 4 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
IIT बॉम्बे- नकल करते पकड़े जाने पर सीधे कार्रवाई नहीं:पहले छात्र का पक्ष सुनेंगे; नया ड्राफ्ट तैयार, साहिल सुसाइड केस के बाद फैसला

छात्रों पर पढ़ाई का दबाव और आत्महत्या के मामलों को देखते हुए IIT बॉम्बे कई नियम बदलने की तैयारी में है। इसी के तहत संस्थान ने परीक्षा में गड़बड़ी के आरोपों पर छात्रों के खिलाफ कार्रवाई के लिए नई एसओपी का ड्राफ्ट तैयार किया है। बीटेक छात्र साहिल वाकोडे की 18 सितंबर को आत्महत्या के बाद तैयार किए गए इस ड्राफ्ट में छात्रों को आपत्ति दर्ज कराने और मार्गदर्शन लेने का मौका देने पर जोर दिया गया है।

मसौदे पर इस सप्ताह होने वाली आपातकालीन सीनेट बैठक में फैसला होगा। नई एसओपी में नकल करते पकड़े जाने पर कार्रवाई से पहले छात्र को मेंटर या विभागाध्यक्ष से बात करने का मौका देने का प्रावधान हो सकता है। परीक्षा में अनुचित साधनों के मामलों में दी जाने वाली सजा की भी समीक्षा की गई है। क्या बदलाव संभव, इससे क्या फायदा एक्सपर्ट बोले- एसओपी में इतनी देर क्यों महेश्वर पेरी, शिक्षा विशेषज्ञ के मुताबिक, उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले बच्चे भी आखिर हमारे ही बच्चे हैं।

यदि घर में किसी बच्चे से कोई गलती हो जाती है या वह भटक जाता है तो क्या हम उसके साथ ऐसा बर्ताव करते हैं कि वह मौत को गले लगा ले। हम निश्चित ही उसे संभालने व सुधारने की कोशिश करते हैं। इसी तरह परीक्षा कक्ष में छात्र के प्रति कार्रवाई के समय कक्ष निरीक्षक को सोचना चाहिए वह उसके अपने बच्चे की तरह ही है।

परीक्षा कक्ष में किसी छात्र पर कार्रवाई को निरीक्षक के विवेक पर नहीं छोड़ा जाना चाहिए। लेकिन शिक्षक व छात्र के बीच बर्ताव कैसा हो, यह बात ज्यादा महत्वपूर्ण है। नकल या अनुचित साधन के प्रयोग के संबंध में निश्चित ही एक एसओपी होनी चाहिए। एसओपी में इतनी देरी आश्चर्य की बात है। ऐसे नियम पूरे देश में सभी शिक्षण संस्थानों को सख्ती से लागू करना चाहिए।

IIT बॉम्बे में इस साल तीन सुसाइड, देश का 9वां मामला इस साल IIT बॉम्बे में सुसाइड का यह तीसरा और देश का 9वां मामला है। पिछले 6 साल के दौरान 2025 में सबसे ज्यादा 16 IIT छात्रों ने सुसाइड किया था। ग्लोबल IIT एलुमनाई सपोर्ट ग्रुप के मुताबिक, पिछले 20 साल में IIT के कुल 160 छात्रों ने आत्महत्या की हैं।

--------------- ये खबर भी पढ़ें… IIT में दाखिले का ट्रेंड, बॉम्बे पहले नंबर पर:टॉप-500 में से 73 प्रतिशत ने सीएसई चुना, सिविल इंजीनियरिंग 1 फीसदी ने भी नहीं आईआईटी जेईई 2026 में भी आईआईटी बॉम्बे टॉ

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

📰 पूरी खबर पढ़ें (Dainik Bhaskar पर जाएं)

💡 पृष्ठभूमि (Background)

IIT बॉम्बे ने नकल के मामलों में छात्र के पक्ष को सुनने और मार्गदर्शन लेने का मौका देने के लिए नया SOP तैयार किया है। यह कदम छात्रों के शैक्षणिक दबाव और आत्महत्या के मामलों को देखते हुए उठाया गया है। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह शैक्षणिक संस्थानों की जवाबदेही और छात्र कल्याण के प्रति जागरूकता बढ़ाती है। यदि इस नीति को लागू किया गया, तो छात्रों को नकल के आरोपों पर निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार मिलेगा, जिससे शैक्षणिक माहौल में सुधार और मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत

शैक्षणिक दबाव से उत्पन्न पीड़ा को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। जब नकल के आरोप लगे, तो पहले छात्र की बात सुनी जाए, ताकि गलतफहमी दूर हो सके। आत्महत्या के बाद भी, संस्था को सहानुभूति और मार्गदर्शन के साथ नयी नीति बनानी चाहिए। इससे न केवल शैक्षणिक ईमानदारी बनी रहेगी, बल्कि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य की भी रक्षा होगी। समाज को यह सिखाना चाहिए कि संघर्ष के समय संवाद और सहायता सबसे बड़ा हथियार है।

J
JKS News Desk

वॉयस ऑफ क्रांति की संपादकीय टीम आपके लिए भोपाल, मध्यप्रदेश और देश की सटीक और विश्वसनीय समाचार प्रस्तुत करती है।