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IIT बॉम्बे-साहिल ने नकल करते पकड़ाने पर माफी मांगी थी:दूसरा मौका देने को कहा था; 40 से ज्यादा बयान दर्ज

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 13 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
IIT बॉम्बे-साहिल ने नकल करते पकड़ाने पर माफी मांगी थी:दूसरा मौका देने को कहा था; 40 से ज्यादा बयान दर्ज

IIT बॉम्बे के 22 वर्षीय छात्र साहिल वाकोडे ने परीक्षा में चीटिंग पकड़े जाने के बाद संस्थान को लिखित माफी दी थी। उसने अपनी गलती मानी और दूसरा मौका देने की मांग की थी। साहिल ने 18 सितंबर की शाम हॉस्टल के कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। इससे कुछ घंटे पहले वह मिड-सेमेस्टर परीक्षा में मोबाइल से ChatGPT इस्तेमाल करते पकड़ा गया था।

मुंबई क्राइम ब्रांच इस मामले की जांच कर रही है। पुलिस ने IIT बॉम्बे के डायरेक्टर शिरीष केदारे और प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला समेत 40 से ज्यादा लोगों के बयान दर्ज किए हैं। साहिल वाकोडे BTech के दूसरे साल का छात्र था। पुलिस के मुताबिक, परीक्षा में कथित तौर पर चीटिंग करते पकड़े जाने के बाद उसने संस्थान को लिखित बयान दिया था।

इस बयान में साहिल ने कहा था कि उसने पेपर की अच्छी तैयारी नहीं की थी। उसने अपनी गलती मानी और संस्थान से दूसरा मौका देने की मांग की थी। प्रोफेसर पर उत्पीड़न और जातिगत भेदभाव के आरोप साहिल के माता-पिता ने प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला पर उत्पीड़न और जातिगत भेदभाव के आरोप लगाए हैं। मुंबई क्राइम ब्रांच ने मामले की जांच के तहत IIT बॉम्बे के डायरेक्टर शिरीष केदारे और प्रोफेसर दुल्ला के बयान भी दर्ज किए हैं।

साहिल के पिता की शिकायत पर पवई पुलिस ने प्रोफेसर दुल्ला के खिलाफ FIR दर्ज की थी। पुलिस के मुताबिक, आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में उन्हें आरोपी बनाया गया है। प्रोफेसर दुल्ला ने पुलिस को दिए बयान में साहिल के माता-पिता द्वारा लगाए गए उत्पीड़न के आरोपों से इनकार किया है। 24 सितंबर से आजाद मैदान में भूख हड़ताल साहिल के माता-पिता रवींद्र और सोनाली वाकोडे ने 24 सितंबर को दक्षिण मुंबई के आजाद मैदान में भूख हड़ताल शुरू की थी।

उन्होंने अपने बेटे के लिए न्याय की मांग की। माता-पिता ने IIT बॉम्बे जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में जातिगत भेदभाव का आरोप लगाया है।

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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💡 पृष्ठभूमि (Background)

IIT बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की नकल के बाद लिखित माफी और दूसरा मौका मांगने की घटना, जिसके बाद उन्होंने आत्महत्या कर ली, यह विषय है। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह शैक्षणिक ईमानदारी, मानसिक स्वास्थ्य और उच्च शिक्षा संस्थानों की जवाबदेही पर प्रकाश डालती है। आम जनता पर इसका असर गहरा हो सकता है: छात्रों में दबाव और चिंता बढ़ सकती है, और संस्थानों को कड़ी नीतियों और मानसिक स्वास्थ्य समर्थन की आवश्यकता पर बल मिलेगा।

🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत

सफलता का सच्चा मापदंड केवल अंक नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और जिम्मेदारी है। जब किसी ने अपनी गलती स्वीकार कर पुनः प्रयास माँगा, तो समाज को सहानुभूति और मार्गदर्शन देना चाहिए, न कि केवल निंदा। आत्महत्या के काले पथ से बचने के लिए शैक्षणिक संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य सहायता और खुली संवाद व्यवस्था ज़रूरी है। युवा को यह सिखाएँ कि असफलता से सीखना ही असली जीत है।

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