इलेक्शन कमीशन बोला- SIR से जुड़े फैसले सर्वसम्मति से हुए:चुनाव आयुक्तों की अलग-अलग राय सामान्य; भाजपा बोली- यही स्वस्थ लोकतंत्र की निशानी
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चुनाव आयोग ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर मीडिया इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट पर अपना पक्ष रखा है। आयोग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रेस रिलीज जारी कर कहा कि कई सदस्यों वाले संवैधानिक संस्था में अलग-अलग राय और सुझाव आना सामान्य है। आयोग ने कहा कि SIR समेत पिछले एक साल में लिए गए सभी अंतिम फैसले सदस्यों की सर्वसम्मति से हुए हैं।
दूसरी तरफ, BJP ने भी कहा कि चुनाव आयुक्तों के बीच अलग-अलग राय होना स्वस्थ लोकतंत्र की निशानी है। दरअसल, इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आपत्ति जताई थी।
इनमें फॉर्म-6 में बदलाव, वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने-हटाने और वोटर डेटा से मुद्दे शामिल थे। रिपोर्ट के दावे और उस पर चुनाव आयोग का जवाब 1. 14 आपत्तियों पर रिपोर्ट और EC की सफाई रिपोर्ट: चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार आयोग के फैसलों और आदेशों पर औपचारिक आपत्ति दर्ज की।
रिपोर्ट में कहा गया कि इनमें से चार आपत्तियां एक ही दिन दर्ज की गई थीं। EC का जवाब: चुनाव आयोग ने कहा कि लिखित नोट, टिप्पणियां, तकनीकी सुझाव और आंतरिक जांच-व्यवस्था सामान्य और लगातार चलने वाली प्रक्रिया हैं। इनका मकसद पारदर्शिता, कानूनी अनुपालन और चुनावी प्रक्रिया को मजबूत करना है।
आयोग ने कहा कि उसके सभी काम कानून और आयोग के निर्देशों के अनुसार हुए हैं। 2.
वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने-हटाने पर सवाल रिपोर्ट: दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियां वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने, हटाने और दोबारा शामिल करने की प्रक्रिया से भी जुड़ी थीं। पश्चिम बंगाल में वोटर डिलीशन से जुड़ी अपीलों को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। EC का जवाब: आयोग ने कहा कि वोटरों के रजिस्ट्रेशन और नाम हटाने का काम इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) और डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर (DEO) जैसे वैधानिक अधिकारी कानून के तहत करते हैं। 3.
वोटर डेटाबेस के केंद्रीकरण पर सवाल रिपोर्ट: संधू और जोशी ने वोटर डेटाबेस तक पहुंच को धीरे-धीरे दिल्ली में केंद्रीकृत किए जाने पर सवाल उठाए। जोशी ने यह सुनिश्चित करने के लिए ऑडिट का सुझाव दिया था कि वोटर रिकॉर्ड में बदलाव केवल अधिकृत अधिकारी ही कर सकें। EC का जवाब: चुनाव आयो
📡 स्रोत: Dainik Bhaskar
💡 पृष्ठभूमि (Background)
इलेक्शन कमीशन ने चुनाव आयुक्तों के बीच स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) पर मीडिया रिपोर्ट के जवाब में कहा कि अलग-अलग राय सामान्य है और सभी निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए। यह विषय चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और निर्णय लेने की विधि पर प्रकाश डालता है। खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह चुनाव आयोग के कार्यों पर सार्वजनिक विश्वास को प्रभावित कर सकती है। यदि आयोग के निर्णय स्पष्ट और एकमत दिखते हैं, तो जनता का भरोसा बढ़ेगा, जबकि असहमति के खुलासे से चुनावी प्रक्रियाओं में सुधार की माँग भी बढ़ सकती है।