इलेक्ट्रिक चाक बना जामताड़ा के कुम्भकारों का आजीविका का साधन
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पीएम विश्वकर्मा योजना से कुंभकारों को मिला नया अवसर, इलेक्ट्रिक चाक से आसान हुआ मिट्टी उत्पाद निर्माण, पारंपरिक बर्तनों के साथ सजावटी सामान भी हो रहे तैयार, बढ़ी आमदनी, आत्मनिर्भर बन रहे जामताड़ा के कुम्भकार।
Short Headline: इलेक्ट्रिक चाक बना जामताड़ा के कुम्भकारों का आजीविका का साधन
पीएम विश्वकर्मा योजना, जामताड़ा, उज्ज्वल
पीएम विश्वकर्मा योजना से कुंभकारों को मिला नया अवसर
इलेक्ट्रिक चाक से आसान हुआ मिट्टी उत्पाद निर्माण
पारंपरिक बर्तनों के साथ सजावटी सामान भी तैयार
बढ़ी आमदनी, आत्मनिर्भर बन रहे जामताड़ा के कुंभकार
एंकर प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना जामताड़ा के पारंपरिक शिल्पकारों, खासकर कुम्भकारों के लिए रोजगार के नए अवसर लेकर आई है। योजना के तहत इलेक्ट्रिक चाक और प्रशिक्षण मिलने से मिट्टी के बर्तन बनाने का काम आसान हुआ है। अब कुंभकार पारंपरिक बर्तनों के साथ सजावटी सामान भी बना रहे हैं, जिससे उनके उत्पादन और आमदनी में बढ़ोतरी हो रही है।
होल्ड अप साउंड रिपोर्ट
वीओ 01. जामताड़ा के कुंभकार पहले पारंपरिक चाक से मिट्टी के बर्तन बनाते थे। इसमें काफी मेहनत लगती थी और उत्पादन भी सीमित रहता था। लेकिन प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना से जुड़ने के बाद उनके काम करने के तरीके में बदलाव आया है। इलेक्ट्रिक चाक और नए औजारों की मदद से वे घड़े, दीये, गमले, कप, प्लेट और सजावटी सामान तैयार कर रहे हैं।
वीओ 02. योजना के तहत कुंभकारों को इलेक्ट्रिक चाक मिलने से मिट्टी के बर्तन बनाने में सहूलियत हुई है। उदलबनी गांव के बंकू पंडित ने बताया अब पूरा परिवार मिलकर काम करता है और कई तरह के उत्पाद तैयार होते हैं। वहीं, नकुल पंडित ने बताया कि इस काम से उन्हें अच्छी आमदनी हो रही है।
अंतिम वीओ प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत पारंपरिक कारीगरों को कौशल प्रशिक्षण, आधुनिक औजार और कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए सहायता उपलब्ध कराने का प्रावधान है। जामताड़ा के कुम्भकारों के लिए यह पहल पुश्तैनी कला को नया स्वरूप देने का अवसर बन चुकी है।
जामताड़ा से उज्ज्वल प्रसाद आजाद की रिपोर्ट।