इमरान पर इमरजेंसी वार, गहराता जा रहा है राजनीतिक संकट
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अक्टूबर 12, नई दिल्ली: पाकिस्तान में इमरान खान की रिहाई की मांग ने सियासी टकराव बढ़ा दिया है। PTI के आंदोलन के बीच खैबर-पख्तूनख्वा में इमरजेंसी लागू करने के फैसले ने संकट और गहरा दिया है। केंद्र सरकार इसे आतंकवाद से निपटने का कदम बता रही है, जबकि PTI इसे अपनी सत्ता पर हमला करार दे रही है।
इमरान खान की पार्टी पीटीआई अपने नेता को जेल से रिहा कराने निकली थी, लेकिन सियासी संग्राम मच गया। प्रदर्शनकारियों की भीड़ से घबराए सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने सड़क पर सेना उतार दी। लेकिन जब मुनीर का यह हथकंड़ा भी काम नहीं आया तो पीटीआई सरकार वाले एक मात्र प्रांत खैबर-पख्तूनख्वा में इमरजेंसी लगाकर सेना को ज्यादा अधिकार देकर इमरान के समर्थकों पर नकेल डालने की नई चाल चल दी है।
शहबाज सरकार का आपातकाल लगाने के पीछे का तर्क है पीटीआई सरकार प्रांत आतंकवादी गतिविधियों को नियंत्रित करने में पूरी तरह विफल रही है। केंद्र सरकार का आरोप है संघीय सरकार के साथ जरूरी सहयोग नहीं कर रही है। शहबाज सरकार पिछले ढाई साल में प्रांत में आतंकवाद और उग्रवाद की घटनाओं में 196 फीसदी की बढ़ोतरी का दावा कर रही है, लेकिन पीटीआई इन आरोपों को खारिज करती है।
पार्टी का दावा है कि आतंकवाद से लड़ने के लिए प्रांत को पर्याप्त फंड और संसाधन मुहैया नहीं कराई गई है। पीटीआई ने इसे नेताओं पर दबाव बनाने की कोशिश बताया और कहा कि ऐसी कार्रवाइयों से उसका संघर्ष नहीं रुकेगा। प्रांतीय सरकार की शक्तियां खत्म करते हुए प्रशासन गवर्नर के हवाले कर दिया गया है।
प्रांत में सेना बुला ली गई है और पूर्व नेताओं को धड़ल्ले से हिरासत में लिया जा रहा है। यहां तक कि प्रांत के पूर्व मुख्यमंत्री अली अमीन गंडापुर को उनके घर में नजरबंद कर दिया गया। दावा है कि खैबर पख्तूनख्वा में पीटीआई की सरकार सेना प्रमुख असीम मुनीर के प्रभाव को चुनौती दे रही थी। इसी वजह से प्रांतीय सरकार और सैन्य नेतृत्व के बीच तनाव बढ़ने की बात कही जा रही है।
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