राजनीति

INDIA की बैठक में नहीं पहुंचे अखिलेश, BJP बोली- 'राहुल गांधी तो...'

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 30 सितंबर 2026 👁️ 1 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
INDIA की बैठक में नहीं पहुंचे अखिलेश, BJP बोली- 'राहुल गांधी तो...'

यूपी विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं. सभी पार्टियों ने अभी से अपनी कमर कसनी शुरू कर दी है.

इसी के मद्देनजर यूपी में इंडिया गठबंधन (सपा-कांग्रेस) को लेकर बीजेपी हमलावर है.

बैठक में समाजवादी पार्टी के शामिल न होने को लेकर बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने तंज कसा है.

प्रदीप भंडारी ने बुधवार (30 सितंबर) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि राहुल गांधी उत्तर प्रदेश में गठबंधन के तहत ज्यादा सीटें हासिल करने के लिए अखिलेश यादव से मोल-भाव कर रहे हैं.

इसके बाद विपक्षी पार्टियों की एकता को लेकर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस की बुलाई बैठक में शामिल न होकर आम आदमी पार्टी और समाजवादी पार्टी ने विपक्ष की एकता के नाम पर राहुल गांधी के दावों की पोल खोल दी है.

विपक्षी एकता पर बीजेपी नेता ने कसा तंज

विपक्ष पर निशाना साधते हुए भंडारी ने कहा कि विपक्ष की एकता तो बस एक बहाना है.

उन्होंने कहा कि पहले EVM बहाना था, कल कुछ और होगा.

नेता विपक्ष और सांसद राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि कांग्रेस राहुल को 100 अलग-अलग तरीकों से फिर से लॉन्च करने की कोशिश कर सकती है, लेकिन 2029 में भी देश की जनता नरेंद्र मोदी को ही प्रधानमंत्री चुनेगी.

Rahul Gandhi is fighting a battle against Akhilesh Yadav in Uttar Pradesh to bargain for more seats in alliance.

AAP and SP by not attending the meeting called by Congress have exposed Rahul Gandhi's call for "Opposition Unity" on SIR.

SIR is just "Bahana", Earlier it was "

Pradeep Bhandari(प्रदीप भंडारी)🇮🇳 (@pradip103) September 30, 2026

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📡 स्रोत: ABP Live

📰 पूरी खबर पढ़ें (ABP Live पर जाएं)

💡 पृष्ठभूमि (Background)

यह खबर उत्तर प्रदेश की 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच BJP और SP-Congress के गठबंधन पर केंद्रित है, जहाँ BJP के प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने समाजवादी पार्टी के शामिल न होने पर तंज कसते हुए राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। यह विषय महत्वपूर्ण है क्योंकि यह आगामी चुनाव में प्रमुख दलों के बीच गठबंधन और विरोध की गतिशीलता को उजागर करता है, जो मतदाताओं के चुनावी विकल्पों पर असर डाल सकता है। आम जनता के लिए इसका असर यह हो सकता है कि पार्टी के भीतर के विवाद और गठबंधन की अनिश्चितता मतदाताओं में अस्थिरता

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