INDIA गठबंधन मार्च: बैरिकेडिंग पर चढ़कर राहुल ने लहराया तिरंगा, धरने से आई तस्वीर
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इंडिया गठबंधन संसद भवन से चुनाव आयोग तक मार्च निकाल रहा है. इस मार्च को पुलिस ने बीच में बैरिकेडिंग लगाकर रोक लिया है.
इसके बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी बैरिकेडिंग के पास ही धरने पर बैठ गए थे. जिसके बाद राहुल गांधी ने बैरिकेड्स पर चढ़कर तिरंगा लहराया है.
तिरंगा लहराने के बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है.
राहुल गांधी,प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव के साथ कई नेताओं को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया है.
कांग्रेस के सांसदों ने पुलिस की बस को घेर लिया है. कई सांसद पुलिस बस के सामने खड़े हो गए हैं.
जिसके बाद राहुल गांधी बस से उतरे और आकाशवाणी भवन में घुस गए और अब वहां से चुनाव आयोग जा रहे हैं.
#WATCH | Delhi | LoP, Lok Sabha, Rahul Gandhi waves the National Flag as he climbs atop a police barrier during INDIA bloc protest against the Election Commission of India https://t.co/7ycJvlKOyG
ANI (@ANI) October 6, 2026
विपक्ष ने लगाए नारे
इंडिया गठबंधन ने ये मार्च संसद भवन के मकर द्वार से शुरू किया था.
जहां पर कई सांसद संदेश लेकर खड़े थे. उन्होंने मुख्य चुनाव आयोग ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है. उन्होंने लिखा, 'एक कचौड़ी, दो समोसा, ज्ञानेश तुम्हारा क्या भरोसा...'.
दूसरे ने लिखा, 'चुनाव आयोग की रबड़ स्टैंप का हत्था बीजेपी है.' वहीं दूसरे ने लिखा, 'बीजेपी ही सीईसी है.'
ईडी गठबंधन मार्च में विपक्षी सांसदों ने आरएसएस की यूनिफॉर्म पहने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कटआउट लिए हुए थे. जंतर-मंतर के पास दिल्ली पुलिस ने बड़ी संख्या में जवान तैनात किए हैं.
क्या है विपक्ष का कहना इंडिया गठबंधन ने 30 सितंबर को बैठक की थी.
जिसके बाद 6 अक्टूबर को विपक्षी सांसदों ने चुनाव आयोग तक मार्च न
📡 स्रोत: ABP Live
💡 पृष्ठभूमि (Background)
राहुल गांधी के नेतृत्व में इंडिया गठबंधन ने संसद भवन से चुनाव आयोग तक एक मार्च शुरू किया, जिसमें विरोधी दलों ने बैरिकेडिंग लगाकर रुकावट पैदा की। यह घटना राजनीतिक विरोध की नई रणनीति को दर्शाती है, जहाँ सार्वजनिक स्थान पर सीधे कार्रवाई करके सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए जा रहे हैं। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे राजनीतिक संवाद में असमानता और पुलिस की हस्तक्षेप की सीमा पर चर्चा होती है, तथा यह दिखाता है कि विपक्षी दल अपनी मांगों को कैसे सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत कर रहे हैं। आम जनता पर इसका असर य