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इंदिरा की हत्या के बाद से दहशत में रहीं सोनिया:बोलीं- हमेशा डर लगा रहता कि अगला नंबर राजीव का होगा; 1991 में हत्या हुई थी

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 8 नवंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
इंदिरा की हत्या के बाद से दहशत में रहीं सोनिया:बोलीं- हमेशा डर लगा रहता कि अगला नंबर राजीव का होगा; 1991 में हत्या हुई थी

इंदिरा की हत्या के बाद घर किला बन गया। कमांडो बच्चों के बेडरूम में तैनात थे। राहुल-प्रियंका को स्कूल से निकाल लिया गया। डर बहुत था, अक्सर ख्याल आता कि अगला नंबर राजीव का ही होगा, वो मारे जाएंगे। 1991 में यही डर सच साबित हुआ। लिट्टे के आत्मघाती हमले में राजीव गांधी की हत्या हो गई। सोनिया गांधी ने गार्जियन को दिए इंटरव्यू में यह बात कही।

उन्होंने अपनी आने वाली किताब ‘बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव’ पर राजीव की हत्या समेत निजी और राजनैतिक मुद्दों पर अपने विचार और अनुभव शेयर किए हैं। सोनिया बताती हैं- 'राजीव को मौत की धमकियां मिल रही थीं। भारतीय खुफिया एजेंसियों यह बात जानती थीं, लेकिन नई सरकार ने इसे नजरअंदाज कर दिया। उनकी सिक्योरिटी हटा ली गई।

मुझे नहीं लगता कि अब हमें कभी सच का पता चल सकेगा।' इसी इंटरव्यू में सोनिया ने अपनी और राजीव की लवस्टोरी पर भी बात की है। उन्होंने बताया कि उस वक्त उन्हें नहीं पता था कि राजीव भारत के सबसे बड़े राजनीतिक परिवार के वारिस हैं। सोनिया ने इन मुद्दों पर बात की… इंदिरा गांधी - घर में मां, बाहर आयरन लेडी: 1968 में भारत आने पर सोनिया और राजीव, इंदिरा गांधी के साथ ही रहने लगे।

बाहर से इंदिरा सख्त 'आयरन लेडी' दिखती थीं, लेकिन सोनिया कहती हैं घर में वो बिल्कुल आम मां थीं। अखबारों में उन्हें सख्त या कठोर दिखाया जाता था, लेकिन घर में वो किसी भी दूसरी मां जैसी थीं। सोनिया के मुताबिक इंदिरा गुस्सा भी खूब करती थीं। किताब में एक किस्सा है जिसके मुताबिक इदिरा ने फैमिली डिनर में गुस्से में अपनी थाली टेबल के पार फेंक दी थी।

सोनिया के मुताबिक इंदिरा ने एक बार उन्हें बताया था कि पहली बार प्रधानमंत्री बनने पर डरी हुई थीं। इमरजेंसी को लेकर परिवार में मतभेद थे: 1975 में इमरजेंसी के फैसले पर परिवार बंटा हुआ था। राजीव इसके खिलाफ थे। उन्होंने मां से कहा था कि अगले चुनाव का इंतजार करो। लेकिन संजय गांधी इमरजेंसी के पक्ष में थे।

एक फैमिली डिनर में संजय ने कहा था - "विपक्ष मां को बर्बाद कर देगा, उन्हें रोका जाना चाहिए।" सोनिया किताब में लिखती हैं, "संजय को काबू में रखने से बाद में हुए बहुत से नुकसान को रोका जा सकता था।" सोनिया कहती हैं इमरजेंसी लगाना गलती थी और इंदिरा गांधी भी बाद में यही महसूस करती थीं। "मुझे हमेशा लगता है कि श्रीमती गांधी दिल से लोकतांत्रिक थीं।

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📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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💡 पृष्ठभूमि (Background)

इंदिरा गांधी की 1984 में हत्या के बाद, भारतीय राजनीति और परिवार पर गहरा असर पड़ा। इस खबर में सोनिया गांधी ने बताया कि कैसे उनके परिवार ने निरंतर दहशत में जीवन बिताया, कमांडो तैनात थे और स्कूल से बच्चों को निकालना पड़ा। यह विषय राजनीतिक हिंसा और उसके परिवारों पर दीर्घकालिक प्रभाव को उजागर करता है। खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाती है कि एक राजनीतिक नेता की हत्या से परिवार की सुरक्षा व्यवस्था कितनी बदल जाती है और कैसे यह डर 1991 में राजीव गांधी की हत्या के साथ पूरा हुआ। आम जनता को यह चेतावनी देत

🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत

सुरक्षा के डर में जीना मनोबल को कमजोर करता है, पर हिंसा का सहारा कभी समाधान नहीं देता। जब हम किसी भी संकट का सामना करते हैं, तो संवाद, कानूनी मार्ग और सहानुभूति को प्राथमिकता दें। समाज को एकजुट होकर सहिष्णुता और शांति की संस्कृति अपनानी चाहिए, ताकि भय के बजाय विश्वास और सहयोग का निर्माण हो सके।

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