अपराध

इंडियन एयरफोर्स ने खगांतक-243 बम का सफल ड्रॉप टेस्ट किया:125 किलो का Mk-81 वॉरहेड लगाया गया; 180km की रेंज तक निशाना लगा सकती है

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 3 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
इंडियन एयरफोर्स ने खगांतक-243 बम का सफल ड्रॉप टेस्ट किया:125 किलो का Mk-81 वॉरहेड लगाया गया; 180km की रेंज तक निशाना लगा सकती है

इंडियन एयरफोर्स ने स्वदेशी लॉन्ग रेंज ग्लाइड बम (LRGB) खगांतक-243 का सफल ड्रॉप टेस्ट किया है। इससे भारत की स्वदेशी हमला करने की क्षमता बढ़ेगी। इसमें 125 किलो का Mk-81 वॉरहेड लगाया गया है। यह बम 144 से 180 किलोमीटर की रेंज तक हमला कर सकता है।

इसकी मदद से लड़ाकू विमान दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम की सीमा में गए बिना दूर के लक्ष्यों को निशाना बना सकते हैं। एयरफोर्स ने पहला टेस्ट पोखरण में सुखोई एसयू-30 एमकेआई से किया था खगांतक-243 को नागपुर की स्टार्टअप कंपनी जेएसआर डायनेमिक्स ने भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) के साथ मिलकर बनाया है।

इंडियन एयरफोर्स ने इसका पहला टेस्ट पोखरण में सुखोई एसयू-30 एमकेआई से किया था। इसे मिग-29के और मिराज-2000 लड़ाकू विमानों में भी शामिल करने की योजना है। एयरफोर्स ने खगांतक-243 के लिए BEL को सीमित संख्या में प्रोडक्शन का ऑर्डर भी दिया है।

ग्लाइड बम को बड़ी संख्या में बनाया जा सकता ग्लाइड बम में क्रूज मिसाइल की तरह अपना इंजन नहीं होता। यह हवा में बने लिफ्ट के सहारे लक्ष्य की ओर बढ़ता है। इसकी लागत कम होने के कारण इन्हें बड़ी संख्या में बनाया जा सकता है। खगांतक सीरीज में 306 और 225 जैसे भारी वेरिएंट भी शामिल हैं, जिनकी मारक क्षमता ज्यादा है।

वहीं, DRDO ने 2025 में 1,000 किलो के गौरव लॉन्ग रेंज ग्लाइड बम का भी परीक्षण किया था। ------------- ये खबर भी पढ़ें… भारत ने वाहक-6 मल्टी-ड्रोन मदरशिप सिस्टम तैयार किया:बिना जीपीएस करेगा हमला; सर्च-डिटेक्ट से डिस्ट्रॉय तक सेना की मदद करेगा भारत की रक्षा क्षमता मजबूत करने के लिए स्वदेशी ‘वाहक-6’ मल्टी-ड्रोन मदरशिप प्रणाली विकसित की गई है।

निजी कंपनी एंड्योरएयर ने सरकारी रक्षा कंपनी भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के सहयोग से इसे तैयार किया है। पूरी खबर पढ़ें…

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

📰 पूरी खबर पढ़ें (Dainik Bhaskar पर जाएं)

🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत

सैन्य प्रगति से राष्ट्र की सुरक्षा बढ़ती है, परंतु शक्ति का उपयोग हमेशा जिम्मेदारी के साथ होना चाहिए। जब संघर्ष की बात आती है, तो संवाद, मध्यस्थता और कानूनी मार्गों को प्राथमिकता दें। तकनीकी उन्नति से हमें शांति के नए रास्ते खोजने का अवसर मिलता है, जिससे हम युद्ध की बजाय सहयोग और सहमति को बढ़ावा दें।

J
JKS News Desk

वॉयस ऑफ क्रांति की संपादकीय टीम आपके लिए भोपाल, मध्यप्रदेश और देश की सटीक और विश्वसनीय समाचार प्रस्तुत करती है।