इंजीनियरिंग कॉलेज के कैंपस में घुसा गंगा का पानी:हॉस्टल तक पहुंची नदी, छात्रावास खाली कर घर लौटे स्टूडेंट्स; ऑनलाइन होगी क्लास
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →भागलपुर में गंगा का जलस्तर बढ़ा हुआ है। पानी इंजीनियरिंग कॉलज के कैंपस में फैल गया है। मुख्य द्वार के पास करीब 2 फीट तक पानी है। हॉस्टल के कैंपस में भी करीब 7 फीट तक पानी है। स्थिति को देखते हुए कॉलेज प्रशासन ने हॉस्टल खाली कराने का निर्णय लिया है। स्टूडेंट्स अपना जरूरी सामान लकेर घर लौट रहे हैं।
छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए ऑनलाइन क्लास की व्यवस्था की हुई है। सभी फैकल्टी को ऑनलाइन कक्षा लेने का निर्देश दिया गया है। अब छात्र अपने घर से ही ऑनलाइन पढ़ाई कर सकेंगे। पानी तेजी से नहीं बढ़ रहा कॉलेज प्रशासन का कहना है कि फिलहाल पानी बहुत तेजी से नहीं बढ़ रहा है, लेकिन जलस्तर में लगातार वृद्धि हो रही है.
ऐसे में हॉस्टल में रह रहे छात्रों की सुरक्षा को देखते हुए उन्हें घर भेजना उचित समझा गया। छात्रों को अपने घर जाने के लिए कहा गया है, ताकि किसी तरह की अप्रिय स्थिति उत्पन्न होने पर उन्हें परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। भागलपुर के निचले इलाकों में बाढ़ गंगा के बढ़ते जलस्तर से भागलपुर के निचले इलाकों में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है.
कई इलाकों में पानी प्रवेश कर चुका है। इसी बीच भागलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज परिसर में पानी पहुंचने से छात्रों और कॉलेज प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। फिलहाल कॉलेज प्रशासन की प्राथमिकता छात्रों की सुरक्षा है। जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है और स्थिति के अनुसार आगे निर्णय लिया जाएगा। पानी धीरे-धीरे बढ़ रहा है डॉ.
राजबिंदु, प्रोफेसर, भागलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज ने बताया कि पानी धीरे-धीरे बढ़ रहा है। इसकी वजह से स्टूडेंट्स की सेफ्टी के लिए उनको हॉस्टल खाली करके घर जाने का आदेश कल ही दे दिया गया था। तब तक इतना पानी भी नहीं था.
उसके बाद ऑनलाइन क्लासेज होंगी। सारे फैकल्टीज को इंस्ट्रक्शंस मिल गए हैं कि सारे क्लासेज को ऑनलाइन लेना है। उन्होंने कहा कि जलस्तर में वृद्धि हो रही है, हालांकि उतनी तेजी से नहीं हो रही है।।
📡 स्रोत: NewsData.io
🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत
गंगा के जलप्रवेश से इंजीनियरिंग कॉलेज की सुविधाएँ क्षतिग्रस्त हुईं, परंतु यह हमें याद दिलाती है कि प्रकृति की शक्ति के सामने मानवीय तंत्र को सुदृढ़ बनाना आवश्यक है। जलवायु परिवर्तन के इस स्पष्ट संकेत पर, हमें जल संरक्षण, बाढ़ प्रबंधन और आपातकालीन योजनाओं पर सामूहिक रूप से कार्य करना चाहिए। इस आपदा से प्रभावित छात्रों को हम सहानुभूति देते हैं और आशा करते हैं कि ऑनलाइन शिक्षा से उनकी पढ़ाई में कोई बाधा न आए।