इंसाफ़ की आस में हाथ ठेले पर राजधानी भोपाल पहुंचे पिता-पुत्र, देखें वीडियो
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करंट से घायल किसान को लेकर भोपाल पहुंचे परिजन, दो माह से कार्रवाई का इंतज़ार—अब दिल्ली कूच का ऐलान
भोपाल। यह तस्वीर सिर्फ़ एक घायल किसान की नहीं, बल्कि उस परिवार की बेबसी और इंसाफ़ की तलाश की कहानी बयां कर रही है, जो अपनी फरियाद लेकर राजधानी के दरवाज़े तक पहुंचा है।

सीहोर जिले की श्यामपुर तहसील के ग्राम बड़वेली निवासी किसान सतीश मेवाड़ा विद्युत करंट की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गए। परिवार का आरोप है कि लंबे समय से इंसाफ़ और मदद की गुहार लगाने के बावजूद उन्हें अपेक्षित राहत नहीं मिली।

मंगलवार को सतीश के पिता प्रहलाद सिंह मेवाड़ा अपने घायल बेटे को हाथ ठेले पर लेकर भोपाल संभागायुक्त कार्यालय पहुंचे। उनके साथ किसानों ने भी आवाज़ बुलंद की और डिप्टी कमिश्नर भारती देवी मिश्रा को ज्ञापन सौंपकर मामले में कार्रवाई की मांग की।

परिवार ने मांग रखी कि हादसे के लिए जिम्मेदार विद्युत अधिकारियों की जवाबदेही तय कर कार्रवाई की जाए। साथ ही घायल किसान को 25 लाख रुपये मुआवज़ा और सरकारी नौकरी दी जाए।
जांच का मिला भरोसा
पीड़ित परिवार को अधिकारियों की ओर से महिला आयोग के निर्देशों के मुताबिक जांच दल गठित कर मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया गया है। अब निगाहें इस जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं।
भोपाल के बाद अब दिल्ली की तैयारी
सतीश के पिता प्रहलाद सिंह मेवाड़ा ने कहा कि अगर भोपाल में भी उनकी फरियाद पर इंसाफ़ नहीं हुआ तो वह अपने घायल बेटे को इसी हाथ ठेले पर लेकर दिल्ली जाएंगे। उन्होंने जंतर-मंतर पर पहुंचकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने अपनी फरियाद रखने की बात कही।
किसानों ने भी चेतावनी दी है कि मांगों पर जल्द गौर नहीं किया गया तो धरना-प्रदर्शन और आंदोलन को और तेज़ किया जाएगा।
तीखे सवाल, जिनका जवाब ज़रूरी है
क्या दो माह से फरियाद कर रहे परिवार की आवाज़ जिम्मेदार अधिकारियों तक नहीं पहुंची?
एक घायल किसान को इंसाफ़ की मांग के लिए हाथ ठेले पर राजधानी तक क्यों आना पड़ा?
अब जांच के भरोसे के बाद क्या पीड़ित परिवार को वास्तविक राहत मिल पाएग