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इंटरनेशनल ट्रेड शो में सजा 75 जिलों की 75 महिला उद्यमियों का ग्रामीण बाजार

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 27 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
इंटरनेशनल ट्रेड शो में सजा 75 जिलों की 75 महिला उद्यमियों का ग्रामीण बाजार

आगरा की जरी-जरदोजी, अमरोहा के मसाले, अयोध्या की हर्बल चाय, आजमगढ़ की ब्लैक पॉटरी, कन्नौज का इत्र, गोरखपुर की टेराकोटा ज्वेलरी और बनारस के कालीन...। उत्तर प्रदेश के गांवों और कस्बों में महिलाओं के हाथों तैयार हो रहे उत्पाद अब स्थानीय हाट-बाजार की सीमा से निकलकर बड़े बाजार की ओर बढ़ रहे हैं। ग्रेटर नोएडा में चल रहे यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में प्रदेश के 75 जिलों से पहुंची स्वयं सहायता समूहों की महिला उद्यमियों ने अपने हुनर से उत्तर प्रदेश की ऐसी ही तस्वीर सामने रखी है।

यहां सिर्फ उत्पाद नहीं बिक रहे, बल्कि हर स्टॉल के साथ किसी गांव, किसी परंपरागत कला और उसे रोजगार में बदलने वाली महिला की कहानी भी जुड़ी है। आगरा की रहनुमा जरी-जरदोजी लेकर पहुंची हैं तो अमरोहा की कौशल्या गौतम के पिसे मसाले अपनी महक बिखेर रहे हैं। अयोध्या की रेणु सिंह की हर्बल चाय और लेमन ग्रास के उत्पाद हैं तो आजमगढ़ की रीता प्रजापति ब्लैक पॉटरी को बड़े बाजार के सामने लेकर आई हैं। कन्नौज की तारावती के पास इत्र है, जबकि वाराणसी की सीता देवी कालीन, फुटमैट और रनर के जरिए बनारस के हुनर की नुमाइंदगी कर रही हैं।

यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गठित स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के लिए यह भागीदारी महज प्रदर्शनी तक सीमित नहीं है। यहां उन्हें अपने उत्पाद बेचने के साथ ग्राहक की पसंद समझने, पैकेजिंग और प्रस्तुति देखने तथा बड़े बाजार में अपने उत्पाद की संभावनाएं तलाशने का अवसर मिल रहा है।

हर जिले के साथ एक अलग हुनर

प्रदेश के एक छोर से दूसरे छोर तक बदलते ही उत्पाद भी बदल रहे हैं। कहीं परंपरागत शिल्प बाजार में जगह बना रहा है तो कहीं गांव की महिलाओं ने रोजमर्रा की जरूरत के उत्पादों को अपने उद्यम का आधार बनाया है।

गोरखपुर की सरोज पाल टेराकोटा ज्वेलरी लेकर आई हैं तो सहारनपुर की सुधा सैनी लकड़ी के हस्तशिल्प और खिलौनों के साथ ट्रेड शो में पहुंची हैं। प्रयागराज की तब्बसुम मकसूद मूंज से टोकरी, डलिया और सजावटी सामान तैयार कर रही हैं। प्रतापगढ़ की प्रज्ञा जायसवाल आंवला-मुरब्बा और आम का अचार लेकर आई हैं। महोबा की रानी के स्टॉल पर पीतल की मूर्तियां और दूसरे शिल्प उत्पाद हैं।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।