इंटर्न डॉक्टरों के समर्थन में प्रदेशभर में जूनियर डॉक्टर लामबंद, आज से ओपीडी और गैर-आपातकालीन सेवाएं बंद
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स्टाइपेंड बढ़ाने समेत लंबित मांगों के समाधान की मांग, इमरजेंसी, ट्रॉमा, आईसीयू और लेबर रूम सेवाएं जारी रहेंगी
भोपाल। मध्यप्रदेश में इंटर्न डॉक्टरों के आंदोलन ने अब प्रदेशव्यापी रूप ले लिया है। इंटर्न डॉक्टरों की मांगों के समर्थन में सरकारी मेडिकल कॉलेजों की जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन ने भी आंदोलन का समर्थन करते हुए तत्काल प्रभाव से नियमित क्लीनिकल सेवाएं, ओपीडी और अन्य गैर-आपातकालीन अस्पताल सेवाएं स्थगित करने का निर्णय लिया है। हालांकि मरीजों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इमरजेंसी, ट्रॉमा, आईसीयू, क्रिटिकल केयर, लेबर रूम और अन्य जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं पहले की तरह जारी रखने की बात कही गई है।

जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन मध्यप्रदेश की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि प्रदेश के इंटर्न डॉक्टर पिछले कई सप्ताह से स्टाइपेंड में संशोधन सहित अपनी लंबित मांगों और कार्य परिस्थितियों से जुड़े मुद्दों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे हैं। एसोसिएशन का कहना है कि सरकार और संबंधित अधिकारियों के समक्ष कई बार मांगें रखी गईं, लेकिन अभी तक ऐसा समाधान सामने नहीं आया है, जिससे आंदोलन समाप्त हो सके।

सोमवार को इंटर्न डॉक्टरों और छात्र प्रतिनिधियों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा वाटर कैनन के इस्तेमाल के बाद विवाद और बढ़ गया। डॉक्टरों की ओर से कार्रवाई में कुछ मेडिकल प्रशिक्षुओं के घायल होने का आरोप लगाया गया है। एसोसिएशन ने प्रदर्शन के दौरान बल प्रयोग की घटना पर चिंता जताते हुए कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखने वाले मेडिकल छात्रों और इंटर्न डॉक्टरों की आवाज सुनी जानी चाहिए।
इसी घटनाक्रम के बीच उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने भी मामले का संज्ञान लेते हुए वाटर कैनन के इस्तेमाल और डॉक्टरों के घायल होने की जानकारी पर निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए हैं। उनके निर्देश पर पुलिस उपायुक्त जोन-2 विकास सहवाल को जांच अधिकारी बनाया गया है। जांच अधिकारी को सभी संबंधित पक्षों को सुनकर शीघ्र रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है।
जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन ने सरकार से इंटर्न और जूनियर डॉक्टरों के प्रतिनिधियों के साथ तत्काल और समयबद्ध बातचीत शुरू करने की मांग की है। एसोसिएशन का कहना है कि मांगों पर निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से चर्चा कर समाधान निकाला जाना चाहिए, ताकि अस्पतालों में सामान्य स्वास्थ्य सेवाएं बहाल हो सकें और मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई तथा कामकाज का माहौल भी सामान्य रहे।
एसोसिएशन ने यह भी स्पष्ट किया है कि आंदोलन के दौरान मरीजों की जान से जुड़ी सेवाओं को प्रभावित नहीं किया जाएगा। इमरजेंसी, ट्रॉमा, आईसीयू, क्रिटिकल केयर और लेबर रूम सहित आवश्यक सेवाएं जारी रहेंगी। नियमित ओपीडी और अन्य गैर-आपातकालीन सेवाओं के स्थगन का निर्णय मांगों के समाधान के लिए दबाव बनाने के उद्देश्य से लिया गया है।
जूनियर डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार की ओर से उनकी मांगों पर ठोस आश्वासन और संतोषजनक पहल नहीं होती है, तो प्रदेश की सभी संबंधित इकाइयों से चर्चा के बाद आंदोलन को और व्यापक किया जा सकता है।
एसोसिएशन ने उम्मीद जताई है कि सरकार मामले की गंभीरता को समझते हुए जल्द पहल करेगी और बातचीत के जरिए समाधान निकाला जाएगा। आंदोलनरत डॉक्टरों का कहना है कि उनका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को बाधित करना नहीं, बल्कि लंबे समय से लंबित मांगों का समाधान हासिल करना है।