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इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड 50% बढ़ा, अब ₹21500 मिलेंगे:आंदोलन खत्म, काम पर लौटे; लाठीचार्ज-वाटर कैनन मामले में 2 पुलिसकर्मी लाइन अटैच

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 17 सितंबर 2026 👁️ 1 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड 50% बढ़ा, अब ₹21500 मिलेंगे:आंदोलन खत्म, काम पर लौटे; लाठीचार्ज-वाटर कैनन मामले में 2 पुलिसकर्मी लाइन अटैच

भोपाल में गांधी मेडिकल कॉलेज के इंटर्न डॉक्टरों का तीन दिन से चल रहा आंदोलन बुधवार को खत्म हो गया। सरकार ने इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड 50% बढ़ाकर ₹21,500 प्रतिमाह करने की मांग मान ली। प्रदर्शन के दौरान लाठीचार्ज और वॉटर कैनन के इस्तेमाल के मामले में 2 पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच किया गया है।

जांच के लिए टीम गठित करने के साथ घायल छात्रों के इलाज की व्यवस्था के निर्देश दिए गए हैं। बुधवार को इंटर्न डॉक्टरों, जूडा और एमटीए प्रतिनिधियों की डिप्टी CM एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल के साथ बैठक हुई। करीब एक घंटे की चर्चा के बाद स्टाइपेंड बढ़ाने पर सहमति बनी। सरकार की कार्रवाई के बाद छात्रों ने कमला पार्क के पास चल रहा प्रदर्शन खत्म कर दिया।

डॉक्टरों ने नारेबाजी कर जीत का जश्न मनाया और काम पर लौटने का ऐलान किया। प्रदर्शन से जुड़ी तस्वीरें देखिए… हमीदिया में 1391 मरीज बिना इलाज लौटे

हड़ताल का सबसे ज्यादा असर हमीदिया अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे मरीजों पर पड़ा। सामान्य दिनों में करीब 3 हजार मरीजों की OPD होती है, लेकिन बुधवार को सिर्फ 1609 पर्चे बन सके। सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक मरीजों को देखने के बाद OPD बंद हो गई। इसके बाद करीब 1391 मरीज बिना डॉक्टर को दिखाए लौट गए। आसपास के जिलों के अलावा इंदौर, सीधी और राजगढ़ से भी मरीज इलाज के लिए पहुंचे थे। कई मरीज पर्चा बनवाने के बाद डॉक्टर का इंतजार करते रहे, लेकिन परामर्श नहीं मिल सका। कुछ मरीज जांच के लिए भटकते रहे तो कई वापस लौट गए। बस और ट्रेन से आए मरीजों की परेशानी और बढ़ गई। 20 ऑपरेशन टाले गए

ऑपरेशन थिएटर में भी हड़ताल का असर रहा। दोपहर 2 बजे तक 20 सर्जरी हुईं, जबकि 20 ऑपरेशन टाल दिए गए। सामान्य दिनों में भोपाल में करीब 40 ऑपरेशन होते हैं। हालांकि, इमरजेंसी और ICU सेवाएं जारी रहीं। हमीदिया की लैब में भी मरीजों की संख्या सामान्य दिनों के मुकाबले काफी कम रही। इन मांगों को लेकर कर रहे थे प्रदर्शन

तीन दिन के आंदोलन के दौरान इंटर्न डॉक्टर OPD और इलेक्टिव OT का बहिष्कार कर रहे थे। डॉक्टरों की प्रमुख मांगों में वन नेशन-वन स्टाइपेंड लागू करना, लाठीचार्ज और वॉटर कैनन के जिम्मेदारों पर कार्रवाई, घायल डॉक्टरों को मुआवजा और प्रदर्शन करने वाले डॉक्टरों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं करना शामिल था। आंदोलन में करीब 600 जूनियर रेज

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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