ईरान के खिलाफ अमेरिका की नई चाल, राष्ट्रपति ट्रंप के निशाने पर तेहरान की ट्रेड लाइफ लाइन

US-Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच भारी तनाव बना हुआ है. अमेरिका ईरान की आर्थिक चोट पहुंचाकर जंग जीतने की कोशिश कर रही है. ऐसे में ट्रंप ने ईरान के खिलाफ नया मोर्चा खोल दिया है.
जिसके तहत ट्रंप अब ईरान पर मिसाइल और बम से नहीं बल्कि आर्थिक रूप से हमला कर रहे हैं. अमेरिका ने ईरान पर नए आर्थिक प्रतिबंध लागू किए हैं. जिसे लेकर ट्रंप का कहना है इससे ईरान की अर्थव्यवस्था टूट रही है.
इस बीच जानकारी मिली है कि ट्रंप ने 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' के तहत ईरान के सैन्य अधिकारियों, साइबर समूहों और शिपिंग कंपनियों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है.
अमेरिका ने ईरान पर लगाए नए प्रतिबंध अमेरिकी विदेश विभाग ने सोमवार को कहा कि अमेरिका ने ईरान के उन लोगों, कंपनियों और जहाजों पर नए प्रतिबंध लगाए हैं, जिन पर तेहरान की सैन्य गतिविधियों, साइबर हमलों और गैर-कानूनी तेल व्यापार में मदद करने का आरोप है.
विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा है कि इन उपायों का मकसद उन नेटवर्क्स को निशाना बनाना है जो हथियार खरीदने, खुफिया जानकारी जुटाने, अमेरिकी इंफ्रास्ट्रक्चर को हैक करने और ईरान की सरकार व इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स-कुद्स फोर्स (IRGC-QF) के लिए रेवेन्यू जुटाने के मकसद से ईरानी तेल की आवाजाही में शामिल हैं.
उन्होंने एक बयान में कहा, "आज अमेरिका ने कई ऐसी संस्थाओं, व्यक्तियों और जहाजों के खिलाफ कड़े कदम उठाए हैं जो ईरानी सरकार की अस्थिर करने वाली गतिविधियों में मदद कर रहे हैं." 24 अगस्त को घोषित ये प्रतिबंध अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' या 'इकोनॉमिक डी-डे' का हिस्सा हैं.
यह ईरान की जीवन रेखाओं को काटने की एक कोशिश है. ईरान के दो ग्रुप्स को बनाया निशाना अमेरिका ने 'डेडनेगर स्टार्टअप स्टूडियो' और ईरानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स साइबर-इलेक्ट्रॉनिक कमांड (IRGC-CEC) पर प्रतिबंध लगाए.
इसके साथ ही अमेरिका ने 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के दौरान ईरान को खाड़ी में अमेरिकी सेना और ठिकानों की पहचान करने में मदद करने के लिए कमर्शियल चीनी सैटेलाइट इमेज का इस्तेमाल करने का आरोप 'डेडनेगर' (DadeNegar) पर लगाया.
बताया जा रहा है कि IRGC-CEC पर अमेरिकी सेना और ठिकानों के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए प्रतिबंध लगाए गए; वाशिंगटन का कहना था कि इस जानकारी का इस्तेमाल ईरान की टारगेट करने की कोशिशों में मदद के लिए किया गया था. अमेरिका ने कहा कि दोनों ग्रुप ईरान की मिलिट्री खरीद से जुड़ी गतिविधियों में शामिल थे.
📡 स्रोत: NewsData.io