ईरान का शांति प्रस्ताव खारिज करना ट्रंप को पड़ेगा भारी? सुप्रीम लीडर मोजतबा ने बनाई नई रणनीति
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US Iran Tension: अमेरिका की ओर से होर्मुज को दोबारा खोलने से जुड़े ईरान के प्रस्ताव को खारिज किए जाने के बाद ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा हुसैनी खामेनेई ने सख्त रुख अपनाया है.
सोमवार को उन्होंने कहा कि ईरान में सेना और आम लोगों के बीच दुश्मनों का सामना करने के लिए पूरी तैयारी है.
ईरान के 'पवित्र रक्षा सप्ताह' और हिजबुल्लाह नेता सैय्यद हसन नसरल्लाह की पुण्यतिथि के मौके पर जारी संदेश में खामेनेई ने देश की एकजुटता पर जोर दिया.
उन्होंने कहा कि ईरान के सशस्त्र बल और समाज के अलग-अलग वर्ग देश के दुश्मनों का मुकाबला करने के लिए तैयार हैं.
खामेनेई ने यह भी कहा कि ईरान में अलग-अलग समुदायों के बीच अपने देश की रक्षा के लिए खासतौर पर सैन्य स्तर पर तैयारी बढ़ी हुई है.
उन्होंने दावा किया कि यह तैयारी ईरान को मजबूत बनाएगी और उसके विरोधियों को नुकसान पहुंचाएगी.
ईरानी सेना की भूमिका पर की चर्चा खामेनेई ने होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा में ईरानी सेना की भूमिका की भी चर्चा की.
उन्होंने कहा कि जलडमरूमध्य की रक्षा कर रहे ईरानी सैनिकों ने दुश्मन की सेनाओं को कड़ी चुनौती दी है.
उन्होंने दावा किया कि पहले दुश्मन की सेनाएं ईरान के दक्षिणी समुद्री इलाकों में गश्त करती थीं, लेकिन अब होर्मुज जलडमरूमध्य के ईरानी लड़ाकों और सुरक्षा बलों के कारण वे अरब सागर से आगे नहीं बढ़ पा रही हैं.
खामेनेई ने कहा कि जब भी दुश्मन ने आगे बढ़ने की कोशिश की, उसे नुकसान उठाना पड़ा.
यह भी पढ़ें: हमास के हमले से पहले ही नेतन्याहू को मिस्र ने दी थी जानकारी, अटैक से पहले इस्राइल ने कहा था- हम तैयार हैं; US मीडिया का दावा खामेनेई ने एकजुट को माना ताकत खामेनेई ने यह भी कहा कि ईरानी समाज में अलग-अलग विचार और मतभेद होने के बावजूद लोग अपने अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट हैं.
उन्होंने कहा कि ईरान के लोग होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा समेत अपने हितों की रक्षा के लिए साथ खड़े हैं. क्या है पूरा विवाद?
पिछले सप्ताह संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सात दिन के एक प्रस्ताव की जानकारी दी थी.
इसके तहत ईरान कुछ शर्तें पूरी होने पर होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए तैयार था. ईरान के मुताबिक, यह प्रस्ताव मध्यस्थों के जरिए अमेरिका तक पहुंचाया गया था.
इसमें जलडमरूमध्य खोलने को अमेरिकी सैन्य दबाव कम करने और कुछ अन्य कदम उठाने से जोड़ा गया था.
रविवार को संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के राजदूत माइक वाल्ट्ज ने बताया कि ट्रंप ने ईरान का प्रस्ताव इसलिए ठुकराया, क्योंकि तेहरान परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत शुरू करने से पहले प्रतिबंधों में राहत और अरबों डॉलर की जमा संपत्तियों तक पहुंच चाहता था.
वाल्ट्ज ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच आगे चलकर किसी न किसी तरह का समझौता करना पड़ सकता है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि ट्रंप सभी विकल्प खुले रखेंगे. ईरान बोला- बातचीत के लिए तैयार लेकिन...
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज के प्रस्ताव से जुड़े दावे को खारिज किया. उन्होंने कहा कि अमेरिकी राजदूत ने ईरान की योजना देखी ही नहीं थी.
अराघची ने कहा कि ईरान बातचीत और कूटनीति के लिए तैयार है, लेकिन अगर उस पर दोबारा हमला होता है तो वह जवाब देने के लिए भी पूरी तरह तैयार है.
उन्होंने कहा कि ईरान किसी भी नए हमले का सामना करेगा, चाहे उससे कितना भी बड़ा युद्ध क्यों न शुरू हो जाए.
उन्होंने यह भी कहा कि ईरान का ध्यान अमेरिका के मध्यावधि चुनावों पर नहीं, बल्कि अपने राष्ट्रीय हितों पर है.
अराघची के मुताबिक, अब यह फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को करना है कि वह कूटनीति का रास्ता चुनते हैं या कोई दूसरा विकल्प.
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📡 स्रोत: NewsData.io