इस्राइली हमले में 20 फलस्तीनियों की मौत, सात मंजिला इमारत ढहने की वजह से हुआ हादसा
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गाजा सिटी में रातभर हुई बमबारी के बीच एक सात मंजिला इमारत ढह गई.
इस हादसे में कम से कम 20 फिलिस्तीनियों की मौत की खबर है, जिनमें पांच बच्चे भी शामिल हैं. वहीं, 100 से ज्यादा लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका जताई गई है. इमारत में करीब 10 परिवार रह रहे थे.
हादसे में 14 लोग घायल हुए हैं. बचाव दल मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए लगातार अभियान चला रहा है. यह हादसा गाजा सिटी के तल अल-हवा इलाके में हुआ.
स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, इमारत पहले से ही युद्ध के दौरान हुए हमलों से क्षतिग्रस्त थी. ऐसे में ढांचा कमजोर हो चुका था.
बुधवार रात इमारत के अचानक गिरने के बाद आसपास रहने वाले लोगों में अफरा-तफरी मच गई.
बचावकर्मियों ने मलबे के नीचे से लोगों की आवाजें सुनने की बात कही है, जिससे कुछ लोगों के अभी जिंदा होने की उम्मीद बनी हुई है.
मलबे में दबे लोगों को निकालने की कोशिश गाजा की सिविल डिफेंस टीम के निदेशक राएड अल-दहशान के मुताबिक, राहत और बचावकर्मियों को मलबे के नीचे से लोगों के आवाज लगाने की आवाजें सुनाई दे रही हैं.
ऐसे में टीमों की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को जिंदा बाहर निकाला जा सके.
घटनास्थल से सामने आए वीडियो में बचावकर्मियों को गिरी हुई दीवार के नीचे फंसे दो लोगों को बाहर निकालने की कोशिश करते देखा गया.
हालांकि, राहत कार्य के सामने सबसे बड़ी चुनौती भारी मशीनरी और जरूरी उपकरणों की कमी है.
मलबा हटाने के लिए पर्याप्त मशीनें उपलब्ध नहीं होने के कारण कई जगह स्थानीय लोग और बचावकर्मी अपने हाथों से मलबा हटाने की कोशिश कर रहे हैं. 10 परिवार इमारत में रह रहे थे रिपोर्ट के मुताबिक, जिस सात मंजिला इमारत के गिरने की घटना हुई, उसमें कम से कम 10 परिवार रह रहे थे.
युद्ध के दौरान बड़ी संख्या में इमारतें क्षतिग्रस्त होने के कारण गाजा में हजारों लोग सुरक्षित आवास की कमी से जूझ रहे हैं.
कई परिवार ऐसी इमारतों में रहने को मजबूर हैं, जिन्हें पहले हुए हमलों में नुकसान पहुंच चुका है.
रॉयटर्स के अनुसार, गाजा में करीब 2,000 क्षतिग्रस्त इमारतों में अब भी बड़ी संख्या में लोग रह रहे हैं.
इन इमारतों की संरचनात्मक स्थिति कमजोर होने के कारण उनके गिरने का खतरा बना हुआ है.
बचाव अभियान में संयुक्त राष्ट्र की टीमें भी शामिल बचाव अभियान में स्थानीय सिविल डिफेंस कर्मियों के साथ संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी एजेंसियों और मिस्र की राहत एजेंसी के कर्मियों के शामिल होने की जानकारी सामने आई है.
संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) के गाजा कार्यालय के प्रमुख एलेसांद्रो म्राकिक ने बचाव अभियान की मुश्किल परिस्थितियों का जिक्र किया.
उन्होंने बताया कि जरूरी भारी उपकरण और मशीनरी की कमी के कारण राहतकर्मियों को मलबा हटाने में काफी कठिनाई हो रही है. कई लोग हाथों से मलबा हटाकर अंदर फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं.
अधिकारियों ने आशंका जताई है कि आने वाले समय में कमजोर इमारतों के गिरने का खतरा और बढ़ सकता है.
करीब 400 इमारतों पर गिरने का खतरा संयुक्त राष्ट्र के अधिकारी के अनुसार, गाजा में करीब 400 ऐसी इमारतें हैं जिनके गिरने का खतरा बना हुआ है. सर्दियों के मौसम के करीब आने के साथ यह जोखिम और गंभीर हो सकता है.
युद्ध से प्रभावित इलाकों में बड़ी संख्या में लोग क्षतिग्रस्त मकानों या अस्थायी ठिकानों में रह रहे हैं.
इस घटना ने गाजा में युद्ध के बाद पैदा हुए आवास और मानवीय संकट को एक बार फिर सामने ला दिया है.
लंबे समय से जारी संघर्ष के कारण बड़ी संख्या में घर और इमारतें क्षतिग्रस्त हुई हैं. ऐसे में विस्थापित परिवारों के लिए सुरक्षित स्थानों की कमी बनी हुई है.
📡 स्रोत: NewsData.io
🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत
गिरती इमारत के बीच 20 जानें जाने की खबर ने हमें याद दिलाया कि संघर्ष के पथ पर चलने से केवल पीड़ा बढ़ती है। हमें शांति की दिशा में कदम बढ़ाना चाहिए, जहाँ संवाद और सहानुभूति से समाधान निकलते हैं। जब कोई विनाशकारी घटना होती है, तो हमें तात्कालिक सहायता के साथ-साथ दीर्घकालिक पुनर्निर्माण की योजना बनानी चाहिए। यह याद रखें कि हर जीवन की कीमत अनमोल है, और हमें मिलकर एक सुरक्षित, सहिष्णु समाज का निर्माण करना चाहिए।