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ISRO का आठ महीने बाद लॉन्च:GSLV-F17 रॉकेट से EOS-05 सैटेलाइट स्पेस में भेजने की तैयारी; पिछले दो मिशन नाकाम

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 3 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
ISRO का आठ महीने बाद लॉन्च:GSLV-F17 रॉकेट से EOS-05 सैटेलाइट स्पेस में भेजने की तैयारी; पिछले दो मिशन नाकाम

इसरो ने गुरुवार की देर रात श्रीहरिकोटा से 2:55 बजे GSLV-F17 रॉकेट से EOS-05 लॉन्च किया। यह मिशन GIST-1 की विफलता के करीब पांच साल बाद होगा। EOS-05 एक इमेजिंग सैटेलाइट है। यह 36 हजार किलोमीटर ऊपर रहकर भारत के बड़े हिस्से की तस्वीरें लेगा। पाकिस्तान-चीन की बॉर्डर समेत कई इलाकों में नजर रख सकेगा।

ISRO करीब आठ महीने बाद कोई लॉन्च करने जा रहा है। इससे पहले जनवरी 2026 और मार्च 2025 में ISRO के दो लॉन्च नाकाम रहे थे। श्रीहरिकोटा से लॉन्च होगा मिशन GSLV-F17 भारत के जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल कार्यक्रम की 19वीं उड़ान थी। इसे श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के सेकेंड लॉन्च पैड से उड़ाया गया।

रॉकेट EOS-05 को सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट यानी सब-जीटीओ में पहुंचाएगा। इस मिशन में चार मीटर व्यास वाला ओजीव कंपोजिट पेलोड फेयरिंग इस्तेमाल होगा। 2021 में GISAT-1 मिशन हुआ था फेल अगस्त 2021 में इसरो ने जीएसएलवी-एफ10 से जीआईएसएटी-1 लॉन्च करने की कोशिश की थी।

क्रायोजेनिक स्टेज में रॉकेट को समस्या आने के बाद मिशन फेल हो गया था। इसके चलते सैटेलाइट ऑर्बिट तक नहीं पहुंच पाया। जीआईएसएटी-1 को जियोस्टेशनरी ऑर्बिट से भारतीय उपमहाद्वीप की करीब-करीब रियल टाइम इमेजिंग के लिए तैयार किया गया था।

ISRO के पिछले 2 लॉन्च फेल हुए PSLV-C62- 12 जनवरी 2026 को यह रॉकेट रक्षा DRDO के 'अन्वेषा' उपग्रह और 15 अन्य सह-यात्री उपग्रहों को ले जा रहा था, लेकिन तीसरे चरण में अनियंत्रित होने के कारण मिशन फेल हो गया।

PSLV-C61-18 मई 2025 को इस मिशन का उद्देश्य अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट EOS-09 को कक्षा में स्थापित करना था, लेकिन तीसरे चरण में कंबशन चैंबर प्रेशर अचानक गिरने से मिशन असफल रहा।

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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💡 पृष्ठभूमि (Background)

ISRO द्वारा GSLV-F17 रॉकेट से EOS-05 इमेजिंग सैटेलाइट का लॉन्च भारत का नवीनतम अंतरिक्ष मिशन है, जो 36,000 किलोमीटर ऊँचाई पर देश के विस्तृत हिस्सों की तस्वीरें लेगा। यह लॉन्च पिछले GIST-1 और अन्य मिशनों की विफलताओं के बाद, लगभग आठ महीनों के अंतराल के बाद, भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इस मिशन से भू-स्थानिक डेटा, प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी और सीमा सुरक्षा में सुधार की उम्मीद है, जिससे आम जनता को बेहतर मौसम पूर्वानुमान, कृषि सहायता और आपदा प्रबंधन सेवाएँ मिलेंगी।

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