जबलपुर- समूह से जुड़कर अनिता ने बदली जिंदगी की तस्वीर, अब पशु सखी और बीमा सखी का कर रही कार्य

अनिता प्रारंभ से ही शिक्षा के प्रति जागरूक रही हैं। उन्होंने 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद जबलपुर के आयुर्वेद कॉलेज से नर्सिंग का डिप्लोमा किया। उन्होंने गांव के मिडिल स्कूल में करीब सात माह तक अतिथि शिक्षक के रूप में कार्य किया। इसके बाद जबलपुर के एक निजी हॉस्पिटल में लगभग दो वर्ष नर्स के रूप में सेवाएं दीं।
उन्होंने एएनएम/जीएनएम के लिए परीक्षा भी दी। इसके साथ ही सिलाई का प्रशिक्षण लेकर कुछ समय तक महिलाओं को निःशुल्क सिलाई सिखाने का कार्य भी किया।
शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़कर डीएड. कर अनिता की इच्छा शिक्षक बनने की उनकी थी, लेकिन परिवार की जिम्मेदारियों और पति के अचानक दुर्घटनाग्रस्त होने के कारण उन्हें अपनी पढ़ाई रोकनी पड़ी। इसके बाद उन्होंने परिवार की जिम्मेदारियों को संभालने के साथ ही समाज सेवा में भी सक्रिय भूमिका निभाई।
अनिता ने ग्राम पंचायत सरपंच और जनपद पंचायत सदस्य का चुनाव भी लड़ा, हालांकि उन्हें सफलता नहीं मिली। इसी दौरान अनिता को आजीविका मिशन के माध्यम से स्व-सहायता समूह से जुड़ने की जानकारी मिली।
कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन (सीआरपी) दीदियों ने उन्हें बताया कि स्व-सहायता समूह के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त होने के साथ-साथ सामाजिक विकास के अवसर भी मिलते हैं। इसके बाद अनिता पटेल ने जुलाई 2019 में महिलाओं के साथ मिलकर नर्मदा स्व-सहायता समूह का गठन किया और समूह की अध्यक्ष बनीं।
समूह के बाद गांव में ग्राम संगठन का गठन हुआ, जिसमें भी उन्होंने अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली। बाद में संकुल स्तरीय संगठन के गठन के समय भी उन्होंने अध्यक्ष के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाई। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने पशु सखी, कृषि सखी और बीमा सखी सहित विभिन्न गतिविधियों का प्रशिक्षण प्राप्त किया।
प्रशिक्षण को रोजगार से जोड़ते हुए अनिता ने पशुपालन और कृषि से संबंधित कार्य प्रारंभ किए। उन्होंने बीमा सखी के रूप में कार्य करने के साथ एलआईसी से संबंधित कार्य भी शुरू किया।