जयपुर में अंतरराष्ट्रीय हवाला और क्रिप्टो सिंडिकेट का भंडाफोड़
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जयपुर पुलिस कमिश्नरेट पश्चिम ने हवाला, फर्जी बैंक खातों और क्रिप्टो करेंसी के जरिए अवैध लेनदेन करने वाले अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गिरोह के मुख्य सरगना सीकर निवासी विकास ढाका को वैशाली नगर से गिरफ्तार किया है। आरोपी के कब्जे से 9 मोबाइल फोन, 8 फिनो पेमेंट डेबिट कार्ड किट और गूगल पे स्कैनर रोल बरामद किए गए हैं। प्रारंभिक जांच में पिछले दो वर्षों में करीब 24 करोड़ रुपये के USDT लेनदेन का खुलासा हुआ है। पुलिस अब गिरोह के विदेशी संपर्कों और अन्य एजेंटों की तलाश में जुटी है।
जयपुर, 30 अक्टूबर। राजधानी जयपुर में हवाला, फर्जी बैंक खातों और क्रिप्टो करेंसी के जरिए चल रहे अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट का पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। जयपुर पुलिस कमिश्नरेट पश्चिम ने कार्रवाई करते हुए गिरोह के मुख्य सरगना विकास ढाका को गिरफ्तार किया है। आरोपी गरीब मजदूरों के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर फर्जी बैंक खाते खुलवाता था और इनके जरिए ऑनलाइन सट्टेबाजी तथा साइबर ठगी की रकम का लेनदेन करता था।
पुलिस जांच में पिछले दो वर्षों में करीब 24 करोड़ रुपये के USDT ट्रांजेक्शन सामने आए हैं। दरअसल, 27 अक्टूबर 2026 को मिली गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस उपायुक्त पश्चिम प्रशांत किरण के निर्देशन में वैशाली नगर थाना पुलिस और साइबर सेल की टीम ने नेमी सागर कॉलोनी स्थित एक अपार्टमेंट में दबिश दी।
यहां से सीकर निवासी विकास ढाका को हिरासत में लेकर गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 9 मोबाइल फोन, 8 फिनो पेमेंट डेबिट कार्ड किट और गूगल पे स्कैनर रोल बरामद किए हैं। जांच में सामने आया कि आरोपी करीब 20 दिन पहले ही जयपुर में अपने नेटवर्क का विस्तार करने आया था। वह जैसलमेर और सीकर के रिसॉर्ट्स एवं रेस्टोरेंट्स में काम करने वाले गरीब मजदूरों को पैसों का लालच देकर उनके पहचान पत्र हासिल करता था।
इसके बाद इन दस्तावेजों के आधार पर अलग-अलग बैंकों में म्यूल यानी फर्जी खाते खुलवाए जाते थे। इतना ही नहीं, इन खातों के जरिए एयरटेल पेमेंट्स बैंक के मर्चेंट QR कोड भी तैयार किए जाते थे, जिन्हें ऑनलाइन सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म और साइबर ठगों को मोटे कमीशन पर बेचा जाता था। ठगी और सट्टेबाजी से प्राप्त होने वाली अवैध रकम को आरोपी क्रिप्टो करेंसी में बदल देता था।
इसके बाद दुबई स्थित हवाला और क्रिप्टो नेटवर्क के जरिए रकम को लिक्विडेट कर भारतीय बाजार में व्हाइट मनी के रूप में वापस खपाने का नेटवर्क संचालित किया जा रहा था। पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक जांच में पिछले दो वर्षों के दौरान आरोपी और उसके सिंडिकेट द्वारा करीब 24 करोड़ रुपये के USDT का लेनदेन किए जाने की जानकारी सामने आई है।
फिलहाल पुलिस जब्त किए गए 9 मोबाइल फोन का फॉरेंसिक विश्लेषण कर रही है। इसके जरिए डिजिटल कीज, टेलीग्राम चैट्स, सक्रिय बैंक खातों और क्रिप्टो वॉलेट्स की जानकारी जुटाई जा रही है। इस कार्रवाई को अतिरिक्त पुलिस आयुक्त राजेश गुप्ता और वृत्ताधिकारी अनिल शर्मा के सुपरविजन में अंजाम दिया गया।
थानाधिकारी अरविंद सिंह और डीएसटी प्रभारी गणेश सैनी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने इस पूरे नेटवर्क का खुलासा किया। अब पुलिस गिरोह से जुड़े अन्य एजेंटों, हवाला कारोबारियों और विदेशी संपर्कों की तलाश में जुटी है। मोबाइल फोन की जांच के बाद इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े कई अन्य महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना है।
फिलहाल जयपुर पुलिस इस पूरे सिंडिकेट की वित्तीय और डिजिटल कड़ियों को खंगालने में जुटी है। जांच का फोकस इस बात पर है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और दुबई तक फैले हवाला एवं क्रिप्टो कारोबार में उनकी क्या भूमिका है।
HOLD BYTE-
🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत
हमारे समाज में जब भी वित्तीय विवाद उत्पन्न होते हैं, तो कानूनी रास्ते अपनाने से न केवल अपराध का सामना होता है, बल्कि विश्वास और पारदर्शिता भी बढ़ती है। जयपुर के इस मामले से हमें यह सिखने को मिलता है कि तकनीक का दुरुपयोग आसान है, परंतु जागरूकता और सख्त नियमन से हम इसे रोके सकते हैं। पीड़ितों के प्रति सहानुभूति दिखाते हुए, हमें शिक्षा, जागरूकता और सुदृढ़ कानूनों के माध्यम से एक सुरक्षित, न्यायपूर्ण समाज की ओर बढ़ना चाहिए।