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जयपुर: पर्यावरण अनुकूल दीयों से शाही मिठाई तक, बाजारों में दिखे अनूठे रंग

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 7 नवंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
जयपुर: पर्यावरण अनुकूल दीयों से शाही मिठाई तक, बाजारों में दिखे अनूठे रंग

नवंबर 07, जयपुर: दीपावली के त्योहार पर देशभर के बाजारों में रौनक है। घरों में सजावट, दीपों की रोशनी और मिठाइयों की खरीदारी के बीच गुलाबी नगरी जयपुर में इस बार त्योहार के कई अनूठे रंग देखने को मिले। कहीं गाय के गोबर से बने पर्यावरण अनुकूल दीये लोगों को आकर्षित कर रहे हैं, तो कहीं सोने से तैयार एक लाख रुपये से अधिक कीमत वाली मिठाई चर्चा का विषय बनी हुई है। वहीं, जयपुर की पारंपरिक लाख की चूड़ियों की मांग भी बाजारों में बनी हुई है।

दीपावली पर रोशनी के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देखने को मिल रहा है। जयपुर की एक गौशाला में गाय के गोबर से विशेष दीये तैयार किए जा रहे हैं। इन दीयों की खासियत यह है कि जलने के बाद इन्हें फेंकने की जरूरत नहीं पड़ती, बल्कि गमलों में खाद के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। पर्यावरण अनुकूल होने के कारण इन दीयों की मांग देश के साथ-साथ विदेशों में भी बढ़ रही है।

वहीं, दीपावली के मौके पर जयपुर के मिठाई बाजार में भी खास आकर्षण देखने को मिला। यहां तैयार की गई 'स्वर्ण प्रसादम' नाम की विशेष मिठाई अपनी कीमत को लेकर चर्चा में है। सोने से तैयार इस मिठाई की कीमत 1 लाख 23 हजार रुपये प्रति किलोग्राम है। हालांकि, पारंपरिक मिठाइयों की मांग भी कम नहीं है। बाजारों में घेवर और मावे से बनी मिठाइयों की दुकानों पर खरीदारों की भीड़ उमड़ रही है।

जयपुर की पहचान मानी जाने वाली लाख की चूड़ियां भी दीपावली की खरीदारी का अहम हिस्सा बनी हुई हैं। अपनी पारंपरिक कारीगरी और रंग-बिरंगे डिजाइनों के लिए मशहूर ये चूड़ियां महिलाओं के श्रृंगार के साथ सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक हैं। त्योहार के दौरान इनकी दुकानों पर भी ग्राहकों की आवाजाही बढ़ी है।

कुल मिलाकर, जयपुर की दीपावली में पर्यावरण संरक्षण, पारंपरिक खानपान और हस्तशिल्प की अनूठी झलक देखने को मिल रही है। गाय के गोबर से बने दीये, सोने से तैयार खास मिठाई और सदियों पुरानी लाख की चूड़ियां गुलाबी नगरी के त्योहार को खास बना रही हैं। यहां आधुनिक सोच और पारंपरिक विरासत का खूबसूरत संगम देखने को मिल रहा है।

💡 पृष्ठभूमि (Background)

यह खबर जयपुर के बाजारों में दीपावली के दौरान पर्यावरण अनुकूल गोबर के दीयों और सोने से बनी एक लाख रुपये से अधिक कीमत वाली मिठाई की चर्चा पर प्रकाश डालती है। यह विषय दिखाता है कि त्योहार की रौनक में पारंपरिक सजावट के साथ नवाचार और लक्जरी का संगम हो रहा है। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाती है कि कैसे परंपरा और आधुनिकता मिलकर उपभोक्ताओं को नई अनुभव देती हैं, और साथ ही पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाती हैं। आम जनता पर इसका असर यह हो सकता है कि लोग अधिक टिकाऊ विकल्प अपनाने के साथ-साथ उच्च मूल्य

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।