जैसलमेर: GIB को जंगल में छोड़ते समय भावुक हुई संरक्षण टीम
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04 अक्टूबर, नई दिल्ली: राजस्थान के जैसलमेर स्थित डेजर्ट नेशनल पार्क के सैम क्षेत्र में आज दो नर ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB) को खुले जंगल में छोड़े जाने के दौरान डॉ. सुतीर्था दत्ता, डॉ. तुषना करकरिया और ऋषिका शर्मा भावुक हो गए।केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वीडियो शेयर कर लिखा- ''जब राजस्थान के सैम में डेजर्ट नेशनल पार्क में 'ग्रेट इंडियन बस्टर्ड' पक्षियों को खुले जंगल में छोड़ा गया, तो डॉ.
सुतीर्था दत्ता, डॉ. तुषना करकरिया और ऋषिका शर्मा भावुक हो गए। कोई सोच भी सकता है कि कुछ लोग निस्वार्थ कामों के लिए अपनी पूरी ज़िंदगी कैसे समर्पित कर देते हैं। उनकी और उस पूरी टीम की तारीफ़ के लिए शब्द कम पड़ जाएंगे, जिन्होंने इसे मुमकिन बनाया है।''यह गंभीर रूप से लुप्तप्राय प्रजाति के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
इस अवसर पर राजस्थान के वन एवं पर्यावरण मंत्री संजय शर्मा और केंद्र व राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया X पोस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ग्रेट इंडियन बस्टर्ड और अन्य प्रजातियों के संरक्षण के लिए वैज्ञानिक समुदाय को लगातार मार्गदर्शन, प्रोत्साहन और समर्थन देने के लिए धन्यवाद दिया।
उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और ग्राउंड स्टाफ के करीब एक दशक के निरंतर प्रयासों का परिणाम है।दो पक्षियों को जंगल में छोड़ना GIB संरक्षण कार्यक्रम का अहम कदम है। अब कार्यक्रम पक्षियों को प्राकृतिक आवास में फिर से बसाने और उनकी संख्या बढ़ाने पर भी ध्यान दे रहा है।
इस अनुभव से आगे की रिलीज की प्रक्रिया को बेहतर बनाया जाएगा।बस्टर्ड रिकवरी प्रोग्राम पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, राजस्थान वन विभाग और भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) की संयुक्त पहल है। इसे इंटरनेशनल फंड फॉर हौबारा कंजर्वेशन और नेशनल CAMPA से वित्तीय सहायता तथा तकनीकी सहयोग मिलता है।
कार्यक्रम में संरक्षण-प्रजनन, आवास प्रबंधन, खतरे कम करना, आवास बहाली और सामुदायिक भागीदारी पर ध्यान दिया जाता है।सैम और रामदेवरा स्थित GIB संरक्षण केंद्रों में वर्तमान में 97 पक्षी हैं। इनमें 40 जंगली अंडों से पैदा हुए हैं, जबकि 57 को कैद में पाला गया है। इनमें से 86 पक्षियों को संरक्षण-प्रजनन के लिए रखा गया है और 11 को जंगल में छोड़ने के लिए निर्धारित किया गया है।
इन्हीं 11 में से दो पक्षियों को रविवार को डेजर्ट नेशनल पार्क में छोड़ा गया।कैप्टिव ब्रीडिंग कार्यक्रम के तहत 2025 में 24 और 2026 में 29 जीवित चूजे पैदा हुए। इसके अलावा, ‘जंपस्टार्ट’ जैसे वैज्ञानिक दृष्टिकोणों ने भी GIB के संरक्षण में योगदान दिया है। इसके तहत जंगली घोंसलों में रखे गए कैप्टिव-लेड अंडों को मादाओं ने स्वीकार किया, जिससे राजस्थान में छह और गुजरात में दो चूजों का सफल जन्म हुआ।राजस्थान वन विभाग डेजर्ट नेशनल पार्क में आवास बहाली के प्रयास भी कर रहा है।
इसके तहत करीब 200 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में बाड़ वाले घास के मैदान विकसित किए जा रहे हैं। WII के दीर्घकालिक टेलीमेट्री अध्ययनों ने इन क्षेत्रों को GIB के प्रमुख प्रजनन आवास के रूप में चिन्हित किया है।विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के आधार पर GIB संरक्षण का काम सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार किया जा रहा है।
(सोर्स- पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय)