जैविक खेती से किसानों की आय बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण पर जोर, तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम सम्पन्न
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सीहोर। ग्राम पंचायत सोनकच्छ, जिला सीहोर में मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद द्वारा प्रायोजित तीन दिवसीय जैविक अपशिष्ट प्रबंधन एवं जैविक खेती प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन हुआ। कार्यक्रम का आयोजन परिवर्तन सहयोग समिति द्वारा किया गया।
प्रशिक्षण के दौरान जैविक खेती के वैज्ञानिक एवं मुख्य वक्ता अशोक मीणा ने किसानों को जैविक खेती की आधुनिक तकनीकों, जैविक अपशिष्ट के बेहतर प्रबंधन और प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने किसानों को रासायनिक खेती पर निर्भरता कम करने तथा जैविक एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर ग्राम पंचायत सोनकच्छ के सरपंच दीवान सिंह ठाकुर उपस्थित रहे। परिवर्तन सहयोग समिति के अध्यक्ष डॉ. निलेश श्रीवास्तव ने भी सहभागिता की और प्रशिक्षण की उपयोगिता पर प्रकाश डाला।
तीन दिवसीय प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने वाले सभी कृषकों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। प्रशिक्षण के दौरान किसानों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए जैविक खेती और जैविक अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।
आयोजकों के अनुसार ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों को टिकाऊ कृषि की दिशा में आगे बढ़ाने के साथ पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ कृषि उत्पादन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
💡 पृष्ठभूमि (Background)
जैविक खेती से किसानों की आय बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण पर जोर देने वाला यह कार्यक्रम, मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद द्वारा प्रायोजित, सीहोर के ग्राम पंचायत सोनकच्छ में तीन दिवसीय प्रशिक्षण के रूप में आयोजित हुआ। यह विषय है कि किस प्रकार जैविक अपशिष्ट प्रबंधन और आधुनिक तकनीकों के जरिए किसानों को सतत कृषि की दिशा में प्रेरित किया जा सकता है। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे किसानों की आय में सुधार और पर्यावरणीय संतुलन दोनों को एक साथ सुदृढ़ किया जा सकता है। आम जनता पर इसका असर यह होगा