राजनीति

'जज साहब, शीशा नीचे कीजिए…अनंत सिंह का इलाका है':मंत्री की बात चुभी तो हराया, सूरजभान से बदला लिया, जानिए कैसे राजनीति में आए

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 8 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
'जज साहब, शीशा नीचे कीजिए…अनंत सिंह का इलाका है':मंत्री की बात चुभी तो हराया, सूरजभान से बदला लिया, जानिए कैसे राजनीति में आए

साल 1990 का वक्‍त। पटना में तैनात डिस्ट्रिक्ट जज किसी काम से पटना जिले के बाढ़ कस्बे के पास नदवां गांव जा रहे थे। बाढ़ रेलवे स्टेशन पर ट्रेन से उतरे, जहां पहले से ही सरकारी गाड़ी उनका इंतजार कर रही थी। जज साहब गाड़ी में बैठ गए और नदवां की ओर चल पड़े। गाड़ी नदवां पहुंचने ही वाली थी कि ड्राइवर ने कहा, ‘जज साहब, गाड़ी का शीशा नीचे कर लीजिए…आगे चेकिंग होगी।’ जज साहब सोच में पड़ गए और बोले, ‘डिस्ट्रिक्ट जज की तलाशी कौन ले सकता है।’ ड्राइवर ने कहा, ‘नदवां अनंत सिंह का गांव है सरजी।

मुहाने पर हथियारों से लैस उनके लोग 24 घंटे बैठे रहते हैं। अनंत सिंह की सिक्‍योरिटी के खातिर हर आने-जाने वाले की चेकिंग करते हैं।’ जज साहब को यकीन ही नहीं हुआ। गाड़ी जब नदवां पहुंची तो उन्‍होंने देखा, लकड़ी के बड़े से लट्ठे से फाटक बनाया गया था। 12-13 आदमी बंदूकें लिए वहां खड़े थे और सभी गाड़ियों की तलाशी ले रहे थे।

जज साहब ने चुपचाप अपनी गाड़ी की तलाशी दी और नदवां में दाखिल हुए। आज बूझे की नाही में कहानी अनंत सिंह और उनके परिवार के पॉलिटिक्स में आने की...। बात 1970-71 की है। नदवां गांव के चंद्रदीप सिंह के बेटे दिलीप सिंह टमटम चलवाया करते थे। इससे उनका घर खर्च चलता था। इसी दौरान उनकी मुलाकात तस्कर कामदेव से हुई।

कामदेव भारत से नेपाल सामान की तस्करी करता था। उससे धीरे-धीरे दिलीप सिंह की नजदीकी बढ़ी और उसका राइट हैंड हो गए। कुछ दिन बाद कामदेव की हत्या हो गई। और उसकी कुर्सी पर दिलीप सिंह ने कब्जा कर लिया। 1975 आते-आते उनका पूरे मोकामा एरिया में दबदबा हो गया। क्राइम की दुनिया में दिलीप सिंह बड़े नाम हो गए थे, लेकिन रिकॉर्ड में उनके खिलाफ कोई संगीन मुकदमा दर्ज नहीं था।

कांग्रेस नेता ने चुनाव जीतने के लिए दिलीप सिंह का लिया साथ 80 के दशक में चुनाव बैलेट पेपर से होता था। यह वही दौर था जब राजनेता अपनी जीत के लिए बाहुबल का सहारा लेते थे। बिहार में बूथ कैप्चरिंग अपने परवान पर था। 1980 विधानसभा चुनाव में श्याम सुंदर सिंह धीरज कांग्रेस के सीताराम केसरी गुट से चुनाव लड़ रहे थे।

जगन्नाथ मिश्र उन्हें हराना चाहते थे। कांग्रेस की आंतरिक सियासत से उबरने के लिए तब पहली बार श्याम सुंदर सिंह धीरज ने इलाके के दबंग दिलीप सिंह की मदद ली। उन्होंने खुलकर सपोर्ट किया और धीरज चुनाव जीत गए। मोकामा के जानकारों की मानें तो ये औ

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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