जल, जंगल और पर्यावरण संरक्षण को लेकर हथियार गांव में अनोखी पहल
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जल, जंगल और पर्यावरण संरक्षण को लेकर हथियार गांव में अनोखी पहल
इस पहल के तहत जीबीएम कॉलेज की छात्राओं को कार्यशाला और इंटर्नशिप के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
07 अक्टूबर , बोधगया (गयाजी, बिहार) : जल, जंगल, पर्यावरण और हरियाली के संरक्षण को लेकर बोधगया के हथियार गांव में अनोखी पहल की जा रही है। इस पहल के तहत जीबीएम कॉलेज की छात्राओं को कार्यशाला और इंटर्नशिप के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा रहा है। थिएटर के माध्यम से छात्राओं को समुदाय से जोड़ने के साथ-साथ सामूहिक जिम्मेदारी का एहसास कराया जा रहा है।
वरिष्ठ रंगकर्मी शम्भु सुमन ने बताया कि पहले ‘थिएटर इन एजुकेशन’ के माध्यम से बच्चों को जोड़ा जाता था, लेकिन अब इसके साथ ‘थिएटर इन कम्युनिटी’ की अवधारणा पर भी काम किया जा रहा है। नाटक के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया जा रहा है कि सामाजिक समस्याओं का समाधान सामूहिक जिम्मेदारी से ही संभव है।
नाटक में विशेष रूप से जल प्रदूषण का मुद्दा उठाया गया। इसके माध्यम से बताया गया कि कुएं, नदी और तालाब को प्रदूषित करने की जिम्मेदारी भी हमारी है और इसके दुष्परिणाम भी हमें ही भुगतने पड़ रहे हैं। ऐसे में जलस्रोतों को स्वच्छ और संरक्षित रखना सभी की जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम के दौरान छात्राओं को संदेश दिया गया कि ‘जल है तो जीवन है और जल है तो कल है।’ वक्ताओं ने कहा कि स्वच्छ जल से स्वस्थ पेड़-पौधे, बेहतर खेती और पौष्टिक भोजन संभव है। वर्तमान समय में जल और वायु की शुद्धता सबसे बड़ी जरूरत है।
कार्यशाला के दौरान क्षेत्र के पुराने तालाबों का भी निरीक्षण किया गया। मदन बापी मंदिर के समीप स्थित करीब 100 से 150 वर्ष पुराने तालाब और वहां मौजूद पुराने नीम के पेड़ का उदाहरण देते हुए बताया गया कि पहले कुएं और तालाबों का पानी स्वच्छ हुआ करता था। हालांकि, समय के साथ जलस्रोतों के प्रदूषित होने की समस्या बढ़ती गई।
इस स्टोरी फोल्डर में :
बाइट: शम्भु सुमन, वरिष्ठ रंगकर्मी बाइट: पाठक, प्रशिक्षणार्थी
बाइट: दीपशिखा मिश्रा, प्रशिक्षणार्थी बाइट: डॉ. मनोज कुमार राय, कृषि वैज्ञानिक
Caption : इस पहल के तहत जीबीएम कॉलेज की छात्राओं को कार्यशाला और इंटर्नशिप के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा रहा है।