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जलकल में करोड़ों के वाहनों से लेकर ठेकों में गड़बड़ी:शासन ने दिए जांच के आदेश, नगर निगम में टेंडर घोटाले की जांच फाइलों में अटकी

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 17 सितंबर 2026 👁️ 1 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
जलकल में करोड़ों के वाहनों से लेकर ठेकों में गड़बड़ी:शासन ने दिए जांच के आदेश, नगर निगम में टेंडर घोटाले की जांच फाइलों में अटकी

कानपुर नगर निगम के ठेकों में हुए भ्रष्टाचार की जांच अभी पूरी नहीं हुई है। इसी बीच जलकल विभाग में वित्तीय और ठेकेदारी से जुड़ी गड़बड़ी की शिकायतों पर शासन ने जांच के निर्देश दिए हैं। यूपी नगर निगम, विकास प्राधिकरण एवं जलकल विभाग संयुक्त वाहन चालक और कर्मचारी संघ की शिकायत को शासन ने गंभीरता से लेते हुए नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय को जांच कराने और रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

पिछले महीने शासन से की गई थीं शिकायतें कर्मचारी संघ ने पिछले महीने जलकल विभाग में कई अनियमितताओं की शिकायत शासन में की थी। आरोप है कि शासकीय धन से करोड़ों रुपए से खरीदे गए वाहनों का सही इस्तेमाल नहीं हो रहा है और उनके रखरखाव में भी नियमों की अनदेखी की जा रही है। इससे विभागीय राजस्व को नुकसान हो रहा है।

इसके अलावा वार्डों के कार्य ठेकेदारी प्रथा से कराने, बिलों में संशोधन और कर्मचारियों के उत्पीड़न समेत कई शिकायतें शासन से की गई हैं। संघ ने इन मामलों की उच्चस्तरीय जांच की मांग की थी। यूपी शासन में उप सचिव रवींद्र सिंह ने नगर आयुक्त को पत्र भेजकर जांच के निर्देश दिए हैं। नगर निगम में भ्रष्टाचार की जांच उलझी कानपुर नगर निगम में धांधली, कमीशनबाजी और ठेकेदार सिंडीकेट से जुड़े मामले की जांच अब फाइलों के फेर में उलझती नजर आ रही है।

मुख्य विकास अधिकारी के नेतृत्व में गठित तीन सदस्यीय समिति के अधिकारियों का कहना है कि रिमाइंडर भेजने के बावजूद नगर निगम की जांच से जुड़ी जरूरी फाइलें उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं। यही स्थिति मामले की जांच कर रही एसआईटी की भी बताई जा रही है। दस्तावेज नहीं मिलने से दोनों जांच प्रभावित हो रही हैं।

अब तक नगर निगम के 13 कर्मचारियों पर निलंबन और तबादले करके कार्रवाई बंद कर दी गई है। दो साल के ठेकों का मांगा था ब्योरा सीडीओ अनुभव जे.

जैन की अध्यक्षता में गठित समिति ने नगर निगम के अधिकारियों से पिछले दो साल में हुए ठेकों का पूरा ब्योरा मांगा था, लेकिन अब तक हर जोन से फर्म पंजीकरण से संबंधित सिर्फ तीन-तीन फाइलें ही मिली हैं। जिन मामलों में शिकायतें हुई हैं, उनसे संबंधित फाइलें, भुगतान का रिकॉर्ड और कराए गए कार्यों से जुड़े दस्तावेज अभी तक समिति को नहीं मिले हैं।

अधिकारी नहीं कर रहे जांच में सहयोग समिति के एक अधिकारी का कहना है कि कई बार फोन के जरिए भी संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया गया, लेकिन मुकदमों में वादी बने अधिकारी फोन रिसीव नहीं कर रहे हैं। रिमाइंडर भेजे जाने के बावजूद जवाब नहीं मिला। समिति का कहना है कि मांगी गई सभी फाइलें मिल जाएं तो चार-पांच दिन में उनका आंकलन कर रिपोर्ट तैयार की जा सकती है।

अगर सोमवार तक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। SIT ने भी मांगी थीं कई फाइलें इस मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल के निर्देश पर एसआईटी गठित की गई थी। टीम ने नगर निगम मुख्यालय पहुंचकर जांच की थी और कुछ दस्तावेज अपने कब्जे में लिए थे।

इसके बाद हॉट मिक्स प्लांट का निरीक्षण भी किया गया। एसआईटी ने जांच आगे बढ़ाने के लिए कुछ अन्य फाइलें और दस्तावेज मांगे थे, लेकिन नगर निगम से पूरा ब्योरा उपलब्ध नहीं कराया गया। इससे एसआईटी की जांच भी आगे नहीं बढ़ पा रही है। जांच में सहयोग करने का दावा नगर निगम के दो अवर अभियंताओं की जांच के लिए शासन को पत्र भेजने की बात कही गई थी।

वहीं अभियंत्रण विभाग के मुख्य अभियंता की जगह इसी स्तर के दूसरे अधिकारी को भेजने के लिए भी शासन को पत्र लिखे जाने का दावा किया गया था। ऐसे में जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। जोन-6 के अधिशासी अभियंता आरके सिंह ने बताया कि समितियों ने जांच के लिए जो भी फाइलें मांगी हैं, उन्हें उपलब्ध करा दिया गया है।

विभाग की ओर से जांच में पूरा सहयोग किया जा रहा है।

📡 स्रोत: NewsData.io

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