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जल्दी Ride चाहिए तो एक्स्ट्रा पैसे दो, Rapido पर CCPA ने ठोका 10 लाख का जुर्माना

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 15 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
जल्दी Ride चाहिए तो एक्स्ट्रा पैसे दो, Rapido पर CCPA ने ठोका 10 लाख का जुर्माना

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण यानी सीसीपीए ने रैपिडो चलाने वाली कंपनी Roppen Transportation Services पर 10 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है.

सीसीपीए ने रैपिडो के राइड बुकिंग इंटरफेस में मिसलीडिंग प्रॉम्प्ट्स, अनफेयर ट्रेड प्रेक्टिसिज़ और डार्क पैटर्न्स पाए हैं.

सीसीपीए के मुताबिक रैपिडो पर राइड बुक करते समय ग्राहकों को ऐसे मैसेज दिखाए गए, 'Higher the price, higher the chance of getting a राइड और 'Captains aren.t accepting at 60.

Try adding +10, +20, +30.

यानी पहले एक किराया दिखाया गया और बुकिंग के दौरान ग्राहक को ज्यादा पैसे देने के लिए प्रेरित किया गया.

इसे Confirm Shaming क्यों माना गया?

सीसीपीए का कहना है कि इस तरह के प्रॉम्प्ट्स से ग्राहक को यह डर महसूस हो सकता है कि अगर उसने ज्यादा पैसे नहीं दिए तो उसे राइड नहीं मिलेगी या राइड मिलने में देरी होगी.

इसी वजह से सीसीपीए ने इसे Confirm Shaming नाम का डार्क पैटर्न माना.

इसमें इंटरफेस ग्राहक पर मनोवैज्ञानिक दबाव डालकर उसे ज्यादा पैसे देने की तरफ धकेलता है.

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Pricing स्लाइडर में भी गड़बड़ी

रैपिडो के 'Set your price स्लाइडर को लेकर भी सीसीपीए ने आपत्ति जताई.

ज्यादा किराया बढ़ाने पर Green कलर में 'higher chance of getting a राइड' दिखाया गया. कम किराया करने पर Red/Orange warning दिखाई गई.

इतना ही नहीं स्लाइडर में कीमत बढ़ाने के लिए ज्यादा जगह दी गई जबकि घटाने के लिए कम जगह थी.

सीसीपीए ने इसे इंटरफेस इंटरफेरेंस नाम का दूसरा डार्क पैटर्न माना यानी एप का डिजाइन ही ग्राहक को ज्यादा कीमत चुनने की तरफ प्रभावित कर रहा था.

एडवां

📡 स्रोत: ABP Live Vyapar

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💡 पृष्ठभूमि (Background)

यह खबर रैपिडो नामक राइड-शेयरिंग ऐप पर केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) द्वारा 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाने के बारे में है। CCPA ने पाया कि ऐप के राइड बुकिंग इंटरफ़ेस में ग्राहकों को गुमराह करने वाले प्रॉम्प्ट्स, अनुचित व्यापारिक प्रथाएँ और डार्क पैटर्न्स इस्तेमाल किए गए थे, जिससे उपयोगकर्ताओं को अधिक कीमत पर राइड लेने के लिए प्रेरित किया गया। यह मामला महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाता है कि सरकारी नियामक एजेंसियाँ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा के लिए सक्रिय हैं। आम जन

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