जनजातीय क्षेत्रों में विकास का रोडमैप तैयार करने की पहल तेज
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जनजातीय क्षेत्रों में विकास का रोडमैप तैयार करने की पहल तेज
बिहार के 24 जनजातीय जिलों में संवाद से विकास का रोडमैप तैयार होगा। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं पर स्थानीय जरूरतों के आधार पर योजनाएं बनेंगी।
28 सितंबर , पटना (पटना, बिहार) : बिहार के जनजातीय समुदायों की स्थानीय जरूरतों और समस्याओं को समझकर विकास की दिशा तय करने की पहल तेज कर दी गई है। बिहार अनुसूचित जनजाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान (BSTRI) की ओर से प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत राज्य के 24 चिन्हित जिलों में सम्मेलन-सह-संगोष्ठियों का आयोजन किया जा रहा है।
इन सम्मेलनों के माध्यम से जनजातीय समुदायों के लोगों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं, आवश्यकताओं और विकास की प्राथमिकताओं की जानकारी ली जा रही है। इसके आधार पर संबंधित विभागों और हितधारकों के समन्वय से समस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस पहल की जाएगी।
अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग की ओर से आयोजित इन सम्मेलनों का उद्देश्य केवल समस्याओं की पहचान करना ही नहीं, बल्कि जनजातीय समुदायों तक सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रभावी ढंग से पहुंचाना भी है।
सम्मेलनों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, आजीविका, कौशल विकास, आवास, पेयजल, सड़क, बिजली, सामाजिक सुरक्षा तथा जनजातीय संस्कृति एवं परंपराओं के संरक्षण जैसे विषयों पर चर्चा की जा रही है। साथ ही, योजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली स्थानीय चुनौतियों को दूर करने और विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया जा रहा है।
चार जिलों में हो चुके सम्मेलन
अभियान के तहत अब तक सुपौल, नवादा, रोहतास और पूर्वी चंपारण जिलों में सम्मेलन आयोजित किए जा चुके हैं। इन कार्यक्रमों में स्थानीय जनजातीय समुदायों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
इनमें विशेष रूप से जनजातीय शिक्षा, रोजगार एवं आजीविका, सांस्कृतिक संरक्षण, आधारभूत सुविधाओं की उपलब्धता और सरकारी योजनाओं की पहुंच जैसे विषय प्रमुखता से सामने आए।
सम्मेलनों के दौरान प्राप्त सुझावों और समस्याओं को संबंधित विभागों तक पहुंचाने के साथ उनके समाधान के लिए आवश्यक कार्रवाई और बेहतर विभागीय समन्वय की दिशा में पहल की जा रही है। शेष चिन्हित जिलों में भी इसी क्रम में सम्मेलन एवं संगोष्ठियों का आयोजन किया जा रहा है।
स्थानीय जरूरतों के आधार पर तय होगी विकास की दिशा
जनजातीय समुदायों के विकास के लिए योजनाओं के निर्धारण और क्रियान्वयन में स्थानीय परिस्थितियों एवं जरूरतों को ध्यान में रखना जरूरी है। इसी उद्देश्य से आयोजित इन सम्मेलनों में समुदाय की भागीदारी को विशेष महत्व दिया जा रहा है।
स्थानीय लोगों से सीधे संवाद के माध्यम से यह समझने का प्रयास किया जा रहा है कि उन्हें किन क्षेत्रों में सबसे अधिक सहायता की आवश्यकता है और सरकारी योजनाओं का लाभ उन तक पहुंचाने में किस तरह की कठिनाइयां सामने आ रही हैं। प्राप्त सुझावों के आधार पर संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर विकास कार्यों को आगे बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
इस स्टोरी फोल्डर में :
बाइट - समीर सौरभ,डीएम,गोपालगंज
Caption : बिहार के 24 जनजातीय जिलों में संवाद से विकास का रोडमैप तैयार होगा। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं पर स्थानीय जरूरतों के आधार पर योजनाएं बनेंगी।