जन्माष्टमी पर इस्कॉन में राधा-कृष्ण 5 लाख की ड्रेस पहनेंगे:न्यूयॉर्क, सैन फ्रांसिस्को के कारीगरों ने तैयार किया डिजाइन; हर रोज 2 बार होगा श्रृंगार
कानपुर के इस्कॉन मंदिर में इस बार जन्माष्टमी पर राधा-कृष्ण का श्रृंगार खास और भव्य अंदाज में होगा। भगवान को करीब पांच लाख रुपये कीमत की विदेशी डिजाइनरों की तैयार पोशाकें पहनाई जाएंगी। 4 से 6 सितंबर तक चलने वाले तीन दिवसीय जन्मोत्सव के लिए छह विशेष पोशाकें तैयार कराई गई हैं।
न्यूयॉर्क, लॉस एंजिल्स, सैन फ्रांसिस्को और थाईलैंड के डिजाइनरों ने वृंदावन के कारीगरों के साथ मिलकर इन्हें तैयार किया है। इस्कॉन मंदिर के आयोजनकर्ता प्रेमाश्रय निताई दास बताया कि जन्मोत्सव के दौरान भगवान का दिन में दो बार अलग-अलग पोशाकों से श्रृंगार किया जाएगा।
वहीं, श्रद्धालुओं के लिए दोपहर 12 बजे और शाम चार बजे कलश अभिषेक की विशेष व्यवस्था रहेगी। पढ़िए पूरी बातचीत... सवाल: जन्माष्टमी पर भगवान श्री कृष्ण की पोशाक में क्या खास रहने वाला है?
जवाब: जैसे हम अपने बच्चों के जन्मदिन पर सबसे बेस्ट कपड़े और अरेंजमेंट्स करते हैं, ठीक वैसे ही हम भगवान को भी सबसे सुंदर अनुभव देना चाहते हैं। मंदिर के वार्डरोब रूम में भगवान की हजारों पोशाकें हैं, लेकिन हर साल जन्माष्टमी पर हम 5 से 6 नई ड्रेसेस प्रभु को अर्पण करते हैं।
इस बार जो पोशाकें तैयार हुई हैं, उनके लिए 6 महीने से 1 साल पहले तैयारी शुरू की गई थी। न्यूयॉर्क, लॉस एंजिल्स और सैन फ्रांसिस्को जैसे बड़े शहरों के इस्कॉन मंदिरों के एक्सपर्ट डिजाइनरों ने मूर्तियों की सटीक फिटिंग और डिजाइन तैयार किया। इसके बाद वृंदावन के कारीगरों ने इन धागों और बारीकियों को कपड़ों पर उकेरा है।
सवाल: भगवान को दिन में कितनी बार और किस तरह की पोशाकें पहनाई जाएंगी? जवाब: हम भगवान को एक जीवित व्यक्ति की तरह ही पूरा प्रेम और सम्मान देते हैं। दिन के समय जब श्रद्धालु बड़ी संख्या में आते हैं, तब प्रभु को भारी, भव्य और बेहद आकर्षक (ऑपुलेंट) पोशाक पहनाई जाती है।
वहीं, रात को सोने और विश्राम के समय एकदम हल्की, आरामदायक और बेहद सिंपल लेकिन सुंदर पोशाक पहनाई जाती है। रंग-बिरंगी लाइटों के बीच जब प्रभु इस आसमानी और रंग-बिरंगी पोशाक में दर्शन देंगे, तो श्रद्धालुओं की नजरें उन पर ही टिकी रह जाएंगी। सवाल: भगवान को दिन में कितनी बार और किस तरह की पोशाकें पहनाई जाएंगी?
जवाब: हम भगवान को एक जीवित व्यक्ति की तरह ही पूरा प्रेम और सम्मान देते हैं। दिन के समय जब श्रद्धालु बड़ी संख्या में आते हैं, तब प्रभु को भारी, भव्य और बेहद आकर्षक (ऑपुलेंट) पोशाक पहनाई जाती है। वहीं, रात को सोने और विश्राम के समय एकदम हल्की, आरामदायक और बेहद सिंपल लेकिन सुंदर पोशाक पहनाई जाती है।
रंग-बिरंगी लाइटों के बीच जब प्रभु इस आसमानी और रंग-बिरंगी पोशाक में दर्शन देंगे, तो श्रद्धालुओं की नजरें उन पर ही टिकी रह जाएंगी। सवाल: कितने दिनों का कार्यक्रम रहेगा और श्रद्धालुओं के लिए क्या खास होगा? जवाब: इस बार जन्मोत्सव का पूरा आयोजन 3 दिनों तक 4, 5 और 6 तारीख को चलेगा।
हम हर साल यही प्रयास करते हैं कि जो भी भक्त मंदिर परिसर में आए, उसे एक नया और बेहद आध्यात्मिक अनुभव मिले। तीन दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में पूजा-अर्चना के साथ-साथ विशेष फूलों से सजावट, हरिनाम संकीर्तन और महाप्रसाद का वितरण लगातार चलता रहेगा। सवाल: श्रद्धालुओं को भगवान का खुद अभिषेक करने का मौका कैसे मिलेगा?
जवाब: भगवान का मुख्य महा-अभिषेक तो रात 12 बजे मंदिर के वरिष्ठ संतों और आश्रम के भक्तों द्वारा किया जाता है। लेकिन हम चाहते हैं कि आम शहरवासी भी इस पुण्य का लाभ उठाएं। इसलिए हमने दिन में दोपहर 12 बजे और शाम 4 बजे अलग-अलग समय पर 'कलश अभिषेक' की व्यवस्था रखी है।
कानपुर शहर के हजारों श्रद्धालुओं को पंचगव्य और पवित्र नदियों के जल से भगवान का खुद अभिषेक करने का मौका मिलेगा। बारिश के मौसम को देखते हुए मंदिर परिसर में एक विशाल वाटरप्रूफ टेंट लगाया गया है, ताकि भक्त बिना किसी रुकावट के पूरे दिन दर्शन और अभिषेक कर सकें।
📡 स्रोत: NewsData.io