Jantar Mantar Gen Z Protest: दिल्ली के प्रदर्शन में आया नया ट्विस्ट, ममता बनर्जी और राकेश टिकैत भी तैयार! क्या किसान भी होंगे शामिल
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Jantar Mantar Gen Z Protest: विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revisions) में आई कथित खामियों को लेकर समूचा विपक्ष भारतीय निर्वाचन आयोग के मुखिया ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं.
पिछले काफी समय से दिल्ली में करीब-करीब रोजाना ही धरना प्रदर्शन चल रहा है.
इस बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के अलावा SIR को रोकने की मांग को लेकर शनिवार (10 अक्तूबर, 2026) को दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन करने की घोषणा की गई है.
इसमें ट्विस्ट यह है कि दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए इस प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी है.
सूत्रों के मुताबिक, नई दिल्ली जिले में बिना अनुमति प्रदर्शन करने और 1000 से अधिक लोगों के इकट्टा होने पर प्रतिबंध है.
किसी तरह की कोई गड़बड़ी ना हो, इसलिए दिल्ली पुलिस ने कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हाउस अरेस्ट करना और होटलों व गेस्ट हाउसों की जांच भी शुरू कर दी है.
ताजा ट्विस्ट यह है कि कई संगठनों ने भी इस प्रदर्शन में शामिल होने का एलान किया है.
राकेश टिकैत भी हो सकते हैं शामिल भारतीय किसान यूनियन (BKU) के नेता और प्रवक्ता राकेश टिकैत ने भी CJP को अपना समर्थन देने का एलान किया है और उनके विरोध प्रदर्शन के लिए दिल्ली आने की संभावना है.
ममता बनर्जी के आने का अनुमान पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भी विपक्ष के विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की संभावना है.
ऐसे में नेताओं के शुक्रवार (09 अक्टूबर, 2026) को राष्ट्रपति भवन की ओर मार्च करने की उम्मीद है. अब यह साफ़ नहीं है कि वो सभी शनिवार को कहां और कैसे इकट्ठा होंगे?
दिल्ली में 26,000 जवान तैनात बताया जा रहा है कि इस बार का विरोध प्रदर्शन हर तरह से अलग है. प्रदर्शनकारी, मांग और उन्हें रोकने की तैयारियां भी जोरदार है. सुरक्षा बलों ने अब तक की सबसे बड़ी ज़मीनी तैनाती की है.
पुलिस ने मीडिया एडवाइज़री जारी की है (लेकिन उन्हें जवाबी एडवाइज़री का भी सामना करना पड़ा है).
दुर्व्यवहार के आरोपों के बीच उन्हें बॉडी-वर्न कैमरों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है और कई मोर्चों पर कई समूहों से चुनौतियों का सामना भी करना पड़ रहा है.
वहीं, दिल्ली पुलिस के साथ काम करने के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) के 26,000 से अधिक जवानों की तैनाती की गई है, जो फरवरी 2020 के विधानसभा चुनावों, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दौरे और दिल्ली दंगों के बाद सबसे बड़ी तैनाती है. 110 अतिरिक्त कंपनियों को मिली अनुमति यहां पर बता दें कि करीब 2 महीने पहले NEET-UG पेपर लीक मामले में तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की गई थी.
उन्हें मजबूर होकर इस्तीफा भी देना पड़ा था. अब मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर ध्यान केंद्रित है.
ऐसे में गृह मंत्रालय ने CAPF (CRPF, BSF, SSB, ITBP और CISF) की कम से कम 110 अतिरिक्त कंपनियों को मंज़ूरी दी है.
ये कंपनियां जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ से आई हैं और दिल्ली में पहले से तैनात 111 कंपनियों के साथ जुड़ गई हैं.
हर CAPF कंपनी में 120-130 जवानों की मंज़ूरी होती है, जिनमें से आम तौर पर 75-80 जवान तैनात किए जाते हैं. कुल 221 कंपनियां दिल्ली पुलिस के साथ मिलकर काम करेंगी.
📡 स्रोत: NewsData.io