जापान में गूंजी राजस्थान की खनिज ताकत

भारत-जापान साझेदारी को मजबूत करने के लिए राजस्थान की खनिज संपदा और प्राकृतिक पत्थर क्षेत्र को वैश्विक मूल्य शृंखला से जोड़ने पर जोर दिया गया। जापान दौरे के दौरान अनिल धींवा ने ग्रेनाइट, संगमरमर और अत्याधुनिक तकनीक व निवेश को लेकर जापानी उद्योग जगत से संवाद किया।
सीकर, 27 अगस्त: भारत और जापान के बीच व्यापार एवं औद्योगिक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में राजस्थान की खनिज संपदा को महत्वपूर्ण संभावनाओं वाले क्षेत्र के रूप में सामने रखा गया।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के नेतृत्व में 24 से 27 अगस्त तक जापान दौरे पर गए भारतीय बिजनेस डेलीगेशन में राजस्थान के खनन एवं प्राकृतिक पत्थर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हुए अनिल धींवा ने प्रभावी सहभागिता की।
जापान दौरे के दौरान टोक्यो, नागोया, ओसाका और कोबे में व्यापार, निवेश, अत्याधुनिक तकनीक, विनिर्माण और क्रिटिकल मिनरल्स से जुड़े विषयों पर जापानी उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ संवाद किया गया। इन चर्चाओं में भारत और जापान के बीच औद्योगिक सहयोग को बढ़ाने तथा दोनों देशों के कारोबारियों के लिए नए अवसर तलाशने पर जोर रहा।
अनिल धींवा ने राजस्थान की खनिज संपदा और प्राकृतिक पत्थर उद्योग की संभावनाओं को जापानी उद्योग जगत के सामने रखा। उन्होंने राजस्थान में उपलब्ध ग्रेनाइट, संगमरमर और अन्य प्राकृतिक पत्थरों को वैश्विक मूल्य शृंखला से जोड़ने की संभावनाओं पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि जापान की अत्याधुनिक तकनीक और निवेश को राजस्थान की खनन एवं प्रसंस्करण क्षमता के साथ जोड़ा जाए तो नए औद्योगिक अवसर विकसित हो सकते हैं। इससे खनिज आधारित उद्योगों में तकनीकी उन्नयन, प्रसंस्करण क्षमता में वृद्धि और वैश्विक बाजारों तक पहुंच को बढ़ावा मिल सकता है।
जापान में भारतीय प्रतिनिधिमंडल के कार्यक्रमों के दौरान व्यापार और निवेश के साथ सांस्कृतिक संबंधों की झलक भी देखने को मिली। टोक्यो स्थित भारतीय दूतावास में प्रतिनिधिमंडल के स्वागत के दौरान राजस्थान की पारंपरिक घूमर प्रस्तुति और जापान के कागोशिमा की पारंपरिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहीं।
भारत और जापान की इन सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सांस्कृतिक संबंधों और आपसी जुड़ाव को भी रेखांकित किया। व्यापारिक और औद्योगिक सहयोग के साथ सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भारत-जापान संबंधों की मजबूती के महत्वपूर्ण पहलू के रूप में देखा गया।
जापान दौरे में राजस्थान के खनन एवं प्राकृतिक पत्थर क्षेत्र की भागीदारी से राज्य की खनिज संपदा को अंतरराष्ट्रीय निवेश और तकनीकी सहयोग के नए अवसरों से जोड़ने की संभावनाएं सामने आई हैं।
राजस्थान के ग्रेनाइट, संगमरमर और प्राकृतिक पत्थर क्षेत्र को जापानी तकनीक, निवेश और वैश्विक बाजार से जोड़ने पर जोर राज्य के खनिज आधारित उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।