जस्टिस भुयान बोले- प्रदर्शनकारियों पर अफसरों का हमला बेहद दुखद:पुलिस का रवैया बदलना जरूरी; कस्टडी में मौत और फर्जी एनकाउंटर गंभीर अपराध
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जल भुयान ने जंतर-मंतर प्रदर्शन में पुलिसकर्मियों पर प्रदर्शनकारियों से मारपीट के आरोपों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जब आईपीएस अधिकारी खुद प्रदर्शनकारियों पर हमला करते दिखाई देते हैं, तो यह बेहद दुखद है।
जस्टिस भुयान ने कहा कि पुलिस से जिस निष्पक्षता की उम्मीद की जाती है, वह कहीं गायब होती दिख रही है। पुलिस को अपना रवैया बदला होगा। साथ ही उन्होंने कहा कि हिरासत में मौत और फर्जी एनकाउंटर गंभीर अपराध हैं।
पुलिस की विश्वसनीयता बनाए रखना जरूरी जस्टिस भुयान ने कहा कि सड़क पर सीटी और लाठी लेकर खड़ा पुलिसकर्मी आम लोगों के लिए राज्य की शक्ति और अधिकार का प्रतीक होता है। जब किसी नागरिक को लगता है कि उसके साथ गलत हुआ है, तो वह मदद के लिए पुलिस के पास जाता है। इसलिए पुलिस की विश्वसनीयता बनाए रखना बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि पुलिस बिना जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किए और मानवाधिकारों का उल्लंघन किए बिना भी प्रभावी ढंग से काम कर सकती है। इसके लिए उसे संविधान का पालन करते हुए पेशेवर, निष्पक्ष और ईमानदार तरीके से काम करना होगा।
हिरासत में मौत सभ्य समाज का गंभीर अपराध जस्टिस भुयान ने हिरासत में यातना और मौत के बढ़ते मामलों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कानून के शासन वाले सभ्य समाज में हिरासत में मौत सबसे गंभीर अपराधों में से एक है।
जांच, पूछताछ या किसी भी स्थिति में किसी व्यक्ति के साथ यातना, क्रूर, अमानवीय या अपमानजनक व्यवहार नहीं किया जा सकता। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के 1997 के डीके बसु बनाम पश्चिम बंगाल मामले का हवाला देते हुए कहा कि गिरफ्तारी के बाद भी नागरिकों के मौलिक अधिकार खत्म नहीं होते।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद किसी नागरिक का जीवन का अधिकार निलंबित हो जाता है? जस्टिस भुयान ने कहा कि इसका जवाब स्पष्ट रूप से नहीं है।
डीके बसु फैसले में गिरफ्तारी और पूछताछ के नियम जस्टिस भुयान ने बताया कि डीके बसु फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी और पूछताछ के दौरान पुलिस के लिए कई निर्देश जारी किए थे। अदालत ने यह भी माना था कि मानवाधिकारों के उल्लंघन पर पीड़ित को मुआवजा दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जब सरकारी अधिकारी खुद कानून तोड़ने लगते हैं, तो इससे लोगों का कानून के प्रति सम्मान कम होता है और अराजकता बढ़ती है। क
📡 स्रोत: Dainik Bhaskar
💡 पृष्ठभूमि (Background)
यह खबर जस्टिस उज्जल भुयान के जंतर-मंतर प्रदर्शन में पुलिस के व्यवहार पर टिप्पणी के बारे में है। भुयान ने पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों पर मारपीट और हिरासत में मौत तथा फर्जी एनकाउंटर के मामलों पर चिंता जताई, और पुलिस के रवैये में बदलाव की अपील की। यह विषय महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारत के लोकतांत्रिक अधिकारों और कानून व्यवस्था के बीच संतुलन पर सवाल उठाता है, और पुलिस के दुरुपयोग के खिलाफ सार्वजनिक जागरूकता बढ़ाता है। आम जनता पर इसका असर यह हो सकता है कि नागरिकों को अपने अधिकारों के प्रति अधिक सतर्क