Jauhar Controversy: स्वरा भास्कर के ‘जौहर’ वाले बयान पर बढ़ा विवाद, साध्वी ऋतम्भरा बोलीं- उसे शर्म की नजर से देखना...
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Sadhvi Ritambhara On Jauhar Controversy: अभिनेत्री स्वरा भास्कर की फिल्म पद्मावत में दिखाए गए जौहर के दृश्य को लेकर की गई टिप्पणी के बाद विवाद बढ़ गया है.
स्वरा ने जौहर के चित्रण पर सवाल उठाते हुए कहा था कि इस तरह के दृश्यों से महिलाओं के सम्मान और आत्महत्या को लेकर गलत संदेश जा सकता है.
उनकी टिप्पणी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं.
इसी विवाद के बीच साध्वी ऋतम्भरा ने स्वरा भास्कर की टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया दी है.
उन्होंने जौहर और साका की ऐतिहासिक परंपरा का बचाव करते हुए कहा कि वह स्वरा का नाम लेना भी पसंद नहीं करतीं.
उनके मुताबिक, जौहर जैसी परंपरा को लेकर इस तरह सवाल उठाना या उसे शर्म की नजर से देखना उस परंपरा और उसमें बलिदान देने वाली महिलाओं का अपमान है.
साध्वी ऋतम्भरा ने बताया जौहर का उद्देश्य साध्वी ऋतम्भरा ने कहा कि इतिहास के उस दौर में किलों को घेरने वाले दुश्मनों से महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा को गंभीर खतरा रहता था.
ऐसी परिस्थितियों में महिलाओं ने शत्रुओं के हाथों पड़ने के बजाय अग्नि में प्रवेश कर अपने सम्मान की रक्षा करने का निर्णय लिया.
उन्होंने कहा कि मृत्यु को दूसरे तरीकों से भी स्वीकार किया जा सकता था, लेकिन जौहर का उद्देश्य शत्रुओं के हाथों महिलाओं के सम्मान को जाने से रोकना था.
उन्होंने जौहर को कायरता मानने से इनकार करते हुए कहा कि उनके नजरिए से कायरता वह होती, जब महिलाएं दुश्मनों के सामने आत्मसमर्पण कर देतीं.
उन्होंने जौहर करने वाली महिलाओं के बलिदान को साहस, सम्मान और आत्मसम्मान से जोड़कर देखा. साध्वी ऋतम्भरा ने साका की परंपरा का भी उल्लेख किया.
उन्होंने कहा कि जब महिलाएं जौहर करती थीं, तब पुरुष अंतिम युद्ध के लिए तैयार होते थे.
उनके अनुसार, जिन पुरुषों की पत्नी, मां या बेटियां जौहर करती थीं, वे अंतिम लड़ाई के लिए निकलते थे और शत्रुओं का मुकाबला करते हुए बलिदान देते थे. ‘आज भी अपनी पहचान और परंपराओं के साथ खड़ा है भारत’ उन्होंने कहा कि भारत के इतिहास में ऐसी कई बलिदानी परंपराएं रही हैं, जिन्होंने देश की सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने में भूमिका निभाई.
साध्वी ऋतम्भरा ने पूर्वजों के बलिदान का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत आज भी अपनी पहचान और परंपराओं के साथ खड़ा है.
उन्होंने यह भी कहा कि जिस परंपरा को एक पक्ष गौरव और बलिदान का प्रतीक मानता है, उसे दूसरे नजरिए से शर्म या लज्जा के रूप में देखना उचित नहीं है. उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की सोच की पहचान उसके विचारों से होती है.
फिलहाल स्वरा भास्कर की टिप्पणी और साध्वी ऋतम्भरा की प्रतिक्रिया के बाद यह मुद्दा इतिहास, सिनेमा, महिलाओं के सम्मान और जौहर की ऐतिहासिक व्याख्या को लेकर नई बहस का विषय बन गया है. (ओडिशा से अक्षय महाराणा की रिपोर्ट)
📡 स्रोत: NewsData.io