जयपुर में 7-R रिजॉर्ट सरकारी-जमीन पर बने होने का दावा:राजदरबार पिंकसिटी डेवलपमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड ने जेडीए में दी शिकायत, कार्रवाई की मांग
जयपुर में सांगानेर तहसील के चिमनपुरा गांव में खसरा नंबर 150 पर बने 7-R रिसॉर्ट को लेकर विवाद सामने आया है। राजदरबार पिंकसिटी डेवलपमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड ने जेडीए में शिकायत देकर दावा किया है कि रिजॉर्ट जिस जमीन पर बना है, वह सरकारी जमीन है।
कंपनी का आरोप है कि यहां बिना वैध भू-उपयोग परिवर्तन और विकास अनुमति के निर्माण कर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। कंपनी ने 19 अगस्त को जेडीए आयुक्त और प्रवर्तन विंग के डीआईजी को प्रतिनिधित्व देकर मामले की तत्काल जांच और कार्रवाई की मांग की है।
कंपनी का दावा- खसरा नंबर 150 सरकारी जमीन कंपनी की ओर से दिए गए प्रतिनिधित्व में कहा गया है कि खसरा नंबर 150 जेडीए के अधिकार क्षेत्र में आता है और उपलब्ध राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार जमीन सरकारी है।
कंपनी का दावा है कि 7-R रिसॉर्ट संचालकों के पास राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 की धारा 90-B के तहत कोई वैध प्रमाण पत्र या आदेश नहीं है। इसके अलावा कथित तौर पर भू-उपयोग परिवर्तन और विकास से संबंधित जरूरी अनुमतियां भी उपलब्ध नहीं हैं।
शिकायतकर्ताओं ने कहा कि इसके बावजूद मौके पर निर्माण किया गया और वहां रिजॉर्ट, हॉस्पिटैलिटी और इवेंट से जुड़ी व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। कंपनी ने जेडीए से मौके का भौतिक निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति और रिकॉर्ड का मिलान कराने की मांग की है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का दिया हवाला कंपनी का कहना है कि 20 मई के आदेश में अवैध निर्माण और भू-उपयोग नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामलों में प्रभावी कार्रवाई की जरूरत बताई गई है।
वहीं 9 जुलाई के आदेश का हवाला देते हुए कंपनी ने कहा है कि प्रभावी कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की स्थिति भी बन सकती है। 4 अगस्त के आदेश को बनाया आधार शिकायत में सुप्रीम कोर्ट के 4 अगस्त के आदेश को भी विशेष आधार बनाया गया है।
कंपनी ने दावा किया है कि आदेश में जेडीए क्षेत्र की कृषि और खुली जमीन के भू-उपयोग और उस पर होने वाले अतिक्रमण से जुड़े मुद्दों पर न्यायालय की टिप्पणियां हैं। कंपनी ने जेडीए से खसरा नंबर 150 की वर्तमान राजस्व स्थिति की जांच करने की मांग की है।
साथ ही यह पता लगाने को कहा है कि जमीन के संबंध में धारा 90-B के तहत कोई कार्रवाई या अनुमति हुई है या नहीं। इसके अलावा रिजॉर्ट के निर्माण और व्यावसायिक उपयोग के लिए बिल्डिंग एवं प्लानिंग से संबंधित वैध अनुमति जारी हुई है या नहीं, इसकी भी जांच की मांग की गई है।
निरीक्षण के बाद सीलिंग और ध्वस्तीकरण की मांग कंपनी ने जेडीए से खसरा नंबर 150 का तत्काल मौके पर निरीक्षण कराने, कथित अतिक्रमण और अनधिकृत निर्माण को चिह्नित करने तथा उसकी रिपोर्ट तैयार करने की मांग की है।
शिकायत में कहा गया है कि अगर मौके पर कोई अनधिकृत निर्माण या गतिविधि चलती पाई जाती है तो उसे रोकने के साथ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। कंपनी ने कानूनन जरूरी पाए जाने पर अतिक्रमण हटाने, अनधिकृत निर्माण को सील करने और ध्वस्त करने की कार्रवाई की भी मांग की है।
साथ ही सरकारी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कर सुरक्षित करने के उपाय करने की बात कही गई है।
📡 स्रोत: NewsData.io