अपराध

जेल में बिल्लियों ने बचाई कैदी की जान

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 8 अक्टूबर 2026 👁️ 2 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
जेल में बिल्लियों ने बचाई कैदी की जान

चूहों से निजात के लिए 2022 में लाई गई बिल्लियां बनीं बंदियों और जेल स्टाफ का सहारा, सांप की मौजूदगी का अलर्ट देकर टाला हादसा

अजमेर, 8 अक्टूबर। राजस्थान के अजमेर स्थित हाई सिक्योरिटी जेल में जहां करीब 100 अति-सुरक्षित श्रेणी और हार्डकोर बंदी विभिन्न सक्रिय गैंग्स से जुड़े मामलों में बंद हैं, वहीं इन दिनों जेल का एक अलग ही पहलू चर्चा में है। जेल परिसर में रहने वाली 10 से 12 बिल्लियों का कुनबा बंदियों और जेल स्टाफ के लिए तनाव कम करने के साथ-साथ सुरक्षा में भी अनोखी भूमिका निभा रहा है। हाल ही में इन बिल्लियों की सतर्कता से एक बंदी की जान पर मंडरा रहा खतरा टल गया।

जेल अधीक्षक पारसमल जांगिड़ के अनुसार, हाल ही में रात के समय एक बंदी की सेल में अचानक सांप घुस आया। उस समय बंदी गहरी नींद में सो रहा था। जेल परिसर में मौजूद बिल्लियों ने सांप को देख लिया और उसे घेरकर जोर-जोर से आवाजें निकालनी शुरू कर दीं। बिल्लियों की आवाज सुनकर बंदी की नींद खुल गई। उसने तत्काल जेल स्टाफ को सूचना दी, जिसके बाद प्रहरियों ने मौके पर पहुंचकर सांप को सुरक्षित पकड़ लिया। सुरक्षा कारणों के चलते बंदी और उसके गैंग से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

जेल अधीक्षक ने बताया कि जेल में बिल्लियों के पहुंचने की कहानी भी काफी दिलचस्प है। वर्ष 2022 में जेल परिसर में चूहों की संख्या काफी बढ़ गई थी। चूहों से निजात पाने के लिए जेल प्रशासन एक बिल्ली का जोड़ा लेकर आया था। समय के साथ इनकी संख्या बढ़ती गई और अब जेल में 10 से 12 बिल्लियां मौजूद हैं।

हाई सिक्योरिटी जेल में बंदियों को अकेलेपन और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है। ऐसे में बिल्लियों की मौजूदगी उनके लिए एक सकारात्मक माहौल तैयार करती है। जेल अधीक्षक के मुताबिक, बंदी अक्सर अकेले रहते हैं और बिल्लियों की आवाजाही से जेल के माहौल में जीवंतता बनी रहती है। बिल्लियां जेल स्टाफ के लिए भी सहारा बन गई हैं।

रात के समय जब प्रहरी अकेले ड्यूटी पर तैनात रहते हैं, तो बिल्लियों की अठखेलियां उनका ध्यान तनाव से हटाती हैं और ड्यूटी के दौरान माहौल को सहज बनाए रखती हैं।

अपराध और सजा के कठोर माहौल के बीच जेल परिसर में बिल्लियों का यह कुनबा इंसान और जानवर के बीच बने एक अनूठे रिश्ते की मिसाल बन गया है। कभी चूहों से निजात पाने के लिए लाई गई ये बिल्लियां अब बंदियों और जेलकर्मियों के लिए सकारात्मकता के साथ-साथ एक अप्रत्याशित सुरक्षा सहयोगी की भूमिका भी निभा रही हैं।

बाइट : पारसमल जांगिड़ (जेल अधीक्षक) हाई सिक्योरिटी जेल, अजमेर

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।