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जेपीएससी-जेएसएससी नियुक्ति रद्द मामले में हाईकोर्ट की सुनवाई पूरी, 7 अक्टूबर को अगली तारीख

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 18 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
जेपीएससी-जेएसएससी नियुक्ति रद्द मामले में हाईकोर्ट की सुनवाई पूरी, 7 अक्टूबर को अगली तारीख

Relevance: ORDINARY Slug: HC SUNWAI Short Headline: जेपीएससी-जेएसएससी नियुक्ति रद्द मामले में हाईकोर्ट की सुनवाई पूरी, 7 अक्टूबर को अगली तारीख

Synopsis: जेपीएससी-जेएसएससी नियुक्ति रद्द मामले में हाईकोर्ट की सुनवाई पूरी, 7 अक्टूबर को अगली तारीख, जांच की निगरानी के लिए पूर्व जज गौतम कुमार चौधरी नियुक्त, इंटरवेनर की IA पर नहीं मिली अनुमति।

Category: Judiciary , Student , Youth , Government, Planning

Deadline : 18 SEPTEMBER, RANCHI

18 सितंबर, रांची: झारखंड हाईकोर्ट में जेपीएससी और जेएसएससी की विभिन्न परीक्षाओं के जरिए हुई नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर शुक्रवार को सुनवाई हुई। जस्टिस दीपक रौशन की अदालत ने मामले में फिलहाल अभ्यर्थियों और नियुक्त कर्मियों को मिली राहत बरकरार रखी है। राज्य सरकार की ओर से कोर्ट के पूर्व निर्देश के तहत काउंटर एफिडेविट भी दाखिल किया गया। सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले की जांच प्रक्रिया को लेकर अहम टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि जांच जल्द किसी निष्कर्ष तक पहुंचे, लेकिन इस दौरान निर्दोष लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना नहीं करना चाहिए।

7 अक्टूबर को अगली सुनवाई- अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को निर्धारित की है। फिलहाल सरकार द्वारा नियुक्तियां रद्द करने के आदेश पर लगी रोक बरकरार है। दरअसल, जेपीएससी और जेएसएससी की अलग-अलग परीक्षाओं के माध्यम से हुई नियुक्तियों को राज्य सरकार द्वारा रद्द किए जाने के बाद प्रभावित अभ्यर्थियों और नियुक्त अधिकारियों-कर्मचारियों ने हाईकोर्ट का रुख किया था। याचिकाओं में सरकार के फैसले को चुनौती दी गई है। मामले में आगे की जांच और अदालत की निगरानी के बीच अब अगली सुनवाई पर महत्वपूर्ण दिशा स्पष्ट होने की उम्मीद है।

जांच की निगरानी के लिए पूर्व जज नियुक्त-

अदालत ने पूरे जांच तंत्र की स्वतंत्र निगरानी की आवश्यकता जताते हुए हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश गौतम कुमार चौधरी को मामले की मॉनिटरिंग के लिए नोडल अधिकारी बनाए जाने का निर्देश दिया। अदालत का सुझाव था कि जांच की प्रक्रिया की निगरानी किसी स्वतंत्र व्यवस्था के माध्यम से हो, ताकि जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़े और समयबद्ध निष्कर्ष तक पहुंच सके।

इंटरवेनर की IA पर नहीं मिली अनुमति- मामले में हस्तक्षेप के लिए दायर आईए को अदालत ने स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने माना कि इससे सुनवाई और प्रक्रिया में अतिरिक्त समय लग सकता है। हालांकि, इंटरवेनर की ओर से पेश अधिवक्ता को अपना पक्ष रखने की अनुमति दी गई। सुनवाई में राज्य सरकार, जेपीएससी और याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने अपनी-अपनी दलीलें रखीं। जेपीएससी की ओर से भी जवाब दाखिल किया गया।

एक साथ रद्द नहीं हो सकतीं हजारों नियुक्तियां-

सुनवाई के दौरान अदालत ने अब तक सामने आए तथ्यों पर भी टिप्पणी की। कोर्ट के मुताबिक, प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि सभी नियुक्तियां एक समान तरीके से नहीं हुई हैं और सभी नियुक्तियों में गड़बड़ी मान लेना उचित नहीं होगा। अदालत ने यह भी ध्यान दिलाया कि जेपीएससी जैसी संस्थाओं द्वारा परीक्षा से लेकर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने में लंबा समय लगता है। ऐसे में एक साथ करीब 2,700 नियुक्तियों को रद्द करने के फैसले का व्यापक असर पड़ सकता है और बड़ी संख्या में अधिकारी-कर्मचारियों की नौकरी प्रभावित हो सकती है।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।