जेपीएससी की कार्यप्रणाली पर रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ ने सरकार को घेरा, दो साल पुराने पत्र पर कार्रवाई का मांगा हिसाब

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Slug: SANJAY SETH ON STATE
Title: जेपीएससी की कार्यप्रणाली पर रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ ने सरकार को घेरा, दो साल पुराने पत्र पर कार्रवाई का मांगा हिसाब
Synopsis: जेपीएससी की कार्यप्रणाली पर संजय सेठ ने सरकार को घेरा। कहा- तत्कालीन अध्यक्ष नीलिमा केरकेट्टा ने दो साल पहले चेताया था, फिर भी पत्र पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
Category: Government , Planning , Protest , Student , Youth , Politics
Deadline: 17 AUGUST , RANCHI
17 अगस्त, नई दिल्ली/रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग की कार्यप्रणाली और नियुक्ति प्रक्रियाओं में कथित देरी को लेकर रक्षा राज्य मंत्री और रांची सांसद संजय सेठ ने राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जेपीएससी की तत्कालीन अध्यक्ष डॉ. नीलिमा केरकेट्टा ने करीब दो वर्ष पहले ही आयोग की समस्याओं को लेकर राज्य सरकार को पत्र लिखकर गंभीर स्थिति से अवगत कराया था, लेकिन अब तक उस पत्र पर हुई कार्रवाई स्पष्ट नहीं है।
संजय सेठ ने कहा कि तत्कालीन अध्यक्ष ने अपने पत्र में जेपीएससी के सदस्यों की ओर से महत्वपूर्ण कार्यों और फाइलों को लंबे समय तक लंबित रखने का उल्लेख किया था। साक्षात्कार, परीक्षाफल प्रकाशन और नियुक्तियों की अनुशंसा जैसी प्रक्रियाओं में अनावश्यक देरी की बात भी पत्र में कही गई थी।
उन्होंने कहा कि यह महज प्रशासनिक प्रक्रिया से जुड़ा पत्र नहीं था, बल्कि झारखंड के युवाओं के भविष्य और समयबद्ध नियुक्तियों को लेकर गंभीर चेतावनी थी। तत्कालीन अध्यक्ष ने विश्वविद्यालयों में कुलसचिव, परीक्षा नियंत्रक, वित्त पदाधिकारी और शिक्षकों की नियुक्ति से जुड़ी संचिकाओं के लंबे समय तक लंबित रहने का भी जिक्र किया था।
संजय सेठ के मुताबिक, तत्कालीन अध्यक्ष ने विंडिकेशन और स्क्रूटिनी की प्रक्रिया को अधिकतम तीन दिनों में पूरा करने की बाध्यता समेत JPSC की कार्यप्रणाली में सुधार के कई सुझाव दिए थे। उन्होंने प्रक्रिया नियमावली में आवश्यक संशोधन और सदस्यों की आपत्तियों की समीक्षा से जुड़े अधिकारों को लेकर भी सुझाव दिए थे।
संयुक्त असैनिक प्रतियोगिता परीक्षा को लेकर भी सवाल-
संजय सेठ ने कहा कि संयुक्त असैनिक प्रतियोगिता परीक्षा के परिणाम में भी देरी को लेकर तत्कालीन अध्यक्ष ने सरकार को स्थिति से अवगत कराया था। इस परीक्षा के जरिए डीएसपी, वित्त, वाणिज्य कर, श्रम, सहकारिता और शिक्षा समेत विभिन्न सेवाओं के लिए अधिकारियों का चयन किया जाता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा के बाद भी परिणाम जारी करने में देरी हुई, जबकि हजारों अभ्यर्थी अपने भविष्य को लेकर इंतजार कर रहे थे। उन्होंने कहा कि समय पर नियुक्तियां नहीं होने का असर राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी पड़ता है।
संजय सेठ ने राज्य सरकार से सवाल किया कि जब तत्कालीन जेपीएससीअध्यक्ष ने दो वर्ष पहले ही समस्याओं और उनके समाधान के सुझावों से सरकार को अवगत करा दिया था, तो अब तक क्या कार्रवाई हुई? उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने पत्र को गंभीरता से लिया था तो उसका परिणाम सार्वजनिक किया जाना चाहिए और यदि कार्रवाई नहीं हुई तो युवाओं से जुड़े इतने महत्वपूर्ण विषय पर दो वर्षों तक चुप्पी क्यों साधी गई।
उन्होंने जेपीएससी की कार्यप्रणाली में अनावश्यक विलंब और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग की। साथ ही, तत्कालीन अध्यक्ष के पत्र पर हुई कार्रवाई का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक करने और लंबित नियुक्ति प्रक्रियाओं की समीक्षा करने की मांग की।
संजय सेठ ने कहा कि यह केवल एक पत्र का मामला नहीं है, बल्कि झारखंड के हजारों युवाओं के भविष्य, प्रशासनिक व्यवस्था और सरकारी नियुक्तियों में पारदर्शिता से जुड़ा गंभीर विषय है।