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झांसी की राममलीला में विवाह की खुशियों के बाद वनवास:माता सीता को लेकर वनवास पर निकले भगवान, नम हुईं श्रद्धालुओं की आंखें

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 15 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
झांसी की राममलीला में विवाह की खुशियों के बाद वनवास:माता सीता को लेकर वनवास पर निकले भगवान, नम हुईं श्रद्धालुओं की आंखें

झांसी में नवरात्रि के पावन अवसर पर सदर बाजार में आयोजित हो रही 102 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक रामलीला में बुधवार देर रात मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के वनवास का अत्यंत भावुक मंचन किया गया। इस मार्मिक दृश्य को देख पंडाल में उपस्थित सैकड़ों श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। त्रेतायुग की जीवंत झांकी संचालक शांतनु पांडेय ने बताया कि पौराणिक कथाओं के अनुसार, जनकपुर में माता सीता के स्वयंवर के लिए राजा जनक ने शर्त रखी थी कि जो भी वीर शिवजी के पिनाक (धनुष) को उठाएगा, उसी के साथ माता सीता का विवाह होगा।

मंचन के दौरान दिखाया गया कि कैसे गुरु विश्वामित्र की आज्ञा पाकर भगवान राम ने सहज ही शिवधनुष को उठाकर उसकी प्रत्यंचा चढ़ाई और धनुष खंडित कर दिया। इस ऐतिहासिक पल के साथ ही भगवान राम, भाई लक्ष्मण, भरत और हनुमान के साथ बारात लेकर पहुंचे थे और माता सीता के साथ उनका पावन विवाह संपन्न हुआ।

त्रेतायुग के इस भव्य प्रसंग ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। नियति का चक्र: उल्लास के बीच आया वनवास का वज्रपात मंचन में रामायण के उस अत्यंत मर्मस्पर्शी मोड़ को दिखाया गया, जहां कैकेयी के वचनों और राजा दशरथ के धर्मसंकट के कारण खुशियों का माहौल अचानक पीड़ा में बदल गया। पिता के वचनों की लाज रखने और मर्यादा की स्थापना के लिए भगवान राम ने बिना किसी संकोच के राजपाट त्याग दिया।

रात करीब 10 बजे शुरू हुए इस वनवास प्रसंग के तहत, माता सीता और भ्राता लक्ष्मण संग जब प्रभु श्रीराम वल्कल वस्त्र धारण कर वन के लिए रवाना हुए, तो पूरा पंडाल भावुक हो उठा। धर्म और कर्तव्य की खातिर हंसते-हंसते महलों के सुख छोड़कर वन की कठिन डगर चुनने वाले राम के इस त्याग को देख श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।

102 वर्षों से जारी है यह सांस्कृतिक विरासत मंच संचालक शांतनु पांडेय ने जानकारी दी कि सदर बाजार रामलीला समिति पिछले 102 वर्षों से लगातार इस रामलीला का आयोजन कर रही है। यह समिति की अटूट परंपरा है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी, यहां तक कि कोरोना काल जैसी वैश्विक आपदाओं के बीच भी रामलीला का मंचन कभी खंडित नहीं हुआ।

वृंदावन के कलाकारों का सजीव अभिनय इस वर्ष रामलीला के मंचन को अलौकिक बनाने के लिए धार्मिक नगरी मथुरा (वृंदावन) से विशेष कलाकारों को आमंत्रित किया गया है। इन कलाकारों के जीवंत अभिनय ने पौराणिक पात्रों में जैसे प्राण फूंक दिए हैं, जिसे देखकर दर्शक मुग्ध हो रहे हैं। इससे पहले मंगलवार को शहर में निकाली गई भव्य राम बारात में सैकड़ों रामभक्त शामिल हुए।

मार्ग में जगह-जगह आरती और आदर-सत्कार के साथ उत्सव का माहौल बना, जिसके तुरंत बाद रामलीला के इन मुख्य प्रसंगों की शुरुआत हुई।

📡 स्रोत: NewsData.io

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