झूलती बिजली लाइनों के खिलाफ किसानों का जल सत्याग्रह, विद्युत अधिकारियों पर एफआईआर की मांग
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सीहोर, शाजापुर और भोपाल जिले के किसानों का आंदोलन तेज, नदियों में उतरकर थाली बजाकर जताया विरोध
सीहोर/शाजापुर/भोपाल। खेतों के ऊपर झूलती विद्युत लाइनों और बिजली संबंधी समस्याओं को लेकर सीहोर, शाजापुर और भोपाल जिले के किसानों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। किसानों ने अलग-अलग स्थानों पर नदी में उतरकर जल सत्याग्रह किया और थाली बजाकर अपना विरोध दर्ज कराया। आंदोलनकारी किसानों ने विद्युत विभाग के अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की मांग की है।
किसान नेता पहलाद हाड़ा के अनुसार, ग्राम भैंसा-नागिन में करीब पांच माह पहले खेत में काम कर रहे एक किसान की झूलती 11 केवी विद्युत लाइन की चपेट में आने से मौत हो गई थी। किसानों ने ग्राम ढाबला में भी विद्युत लाइन की चपेट में आने से किसान की मौत, ग्राम बरबेली में करंट लगने से किसान के गंभीर रूप से घायल होने और ग्राम मोरिया में झूलती 11 केवी लाइन की चपेट में आने से महिला किसान की मौत का दावा किया है। किसानों ने ग्राम कुलास कला में करंट लगने से गाय की मौत होने की बात भी कही।
किसानों का आरोप है कि कई स्थानों पर विद्युत लाइनें नीचे और झूलती हुई स्थिति में हैं, जिससे खेतों में काम करने वाले किसानों और ग्रामीणों के लिए खतरा बना हुआ है। किसानों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद विद्युत व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं किया गया।
किसानों की प्रमुख मांग सीहोर विद्युत मंडल के अधीक्षण यंत्री, कार्यपालन यंत्री और श्यामपुर के सहायक यंत्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई करने की है। किसानों का कहना है कि विद्युत हादसों के मामलों में जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
किसान एवं समाजसेवी एमएस मेवाड़ा के नेतृत्व में करीब 25 गांवों के 500 से अधिक किसान पिछले दो माह से आंदोलन कर रहे हैं। किसानों के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, ऊर्जा मंत्री, प्रभारी मंत्री, राज्यपाल, विद्युत मंडल के एमडी ऋषि गर्ग, कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक सहित संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंपे जा चुके हैं। किसानों का आरोप है कि वरिष्ठ अधिकारियों पर अब तक कार्रवाई नहीं हुई, जबकि लाइनमैन स्तर के कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
भोपाल जिले के ग्राम टीला खेड़ी और आसपास के किसानों ने भी नदी में उतरकर जल सत्याग्रह किया। किसानों ने विद्युत लाइनों की स्थिति सुधारने के साथ घरेलू बिजली कनेक्शनों पर आ रहे कथित अधिक बिलों की समस्या का समाधान करने की मांग की।
किसानों अनीश मियां, पूर्व सरपंच, तथा किसान रफीक और अन्य ग्रामीणों ने कहा कि गांवों से खेतों तक कई स्थानों पर विद्युत लाइनें झूल रही हैं। उनका कहना है कि इससे करंट लगने की घटनाओं का खतरा बना रहता है। किसानों ने घरेलू बिजली बिलों की जांच कर वास्तविक खपत के अनुसार बिल जारी करने और अधिक राशि वाले बिलों की समस्या दूर करने की मांग की है।
आंदोलनकारी किसानों ने चेतावनी दी है कि मांगों पर कार्रवाई नहीं होने पर अलग-अलग गांवों में धरना-प्रदर्शन और आंदोलन जारी रखा जाएगा। किसानों ने कहा कि यदि राज्य स्तर पर उनकी शिकायतों का समाधान नहीं हुआ तो वे दिल्ली जाकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने और केंद्र सरकार के समक्ष अपनी मांग रखने का प्रयास करेंगे।