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झूले के सहारे आगे बढ़ रही है करपट गांव के किसानों की उम्मीदें

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 5 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति

अगस्त 05, लाहौल-स्पीति (हिमाचल प्रदेश): मयाड़ घाटी के करपट गांव में किसानों की परेशानी अभी खत्म नहीं हो पाई है। गांव का मुख्य पुल अब भी पानी में डूबा है। ऐसे में किसान झूले के सहारे अपनी गोभी की फसल को सड़कों तक पहुंचा रहे हैं।

गोभी की फसल को करीब दो किलोमीटर पैदल ढोना पड़ रहा है जिसके लिए मजदूर एक पेटी गोभी को ढोने के लिए 80 से 100 रुपये तक ले रहे हैं। वहीं, व्यापारी भी किसानों को करीब 18 रुपये किलो का भाव दे रहे हैं। खेतों में गोभी ओवरसाइज होने लगी है। समय पर फसल के मंडी न पहुंचने से भी किसान चिंतित हैं।

इसी फसल से ही उन्हें बच्चों की पढ़ाई और परिवार चलाने की उम्मीद थी। अब वही फसल चिंता का कारण बन गई है। करपट गांव की महिलाएं भी जान जोखिम में डालकर झूला पार कर रही हैं। हालांकि लोक निर्माण विभाग ने अतिरिक्त झूला लगाने का काम शुरू किया है। लेकिन किसानों को स्थायी राहत पुल और सड़क बहाल होने के बाद ही मिल सकेगी।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।