जीआई टैग मिलने के बांदल में खुला सिरमौर का पहला लोड्या सेंटर
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अगस्त 07, सिरमौर (हिमाचल प्रदेश): सिरमौर के पारंपरिक परिधान लोइया को जुलाई 2026 में आधिकारिक तौर पर जीआई टैग मिलने के बाद अब इसे संरक्षण और बाजार से जोड़ने की पहल तेज हो गई है। जिला मेंनलोईयां का पहला सेंटर खुल गया है। खादी व ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा नौहराधार के बांदल में सिरमौर का पहला लोइयां सेंटर शुरू हो गया है।
सेंटर में स्थानीय लोगों को लोइयां तैयार करने का प्रशिक्षण देने के साथ इस पारंपरिक हुनर को स्वरोजगार से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। सेंटर के लिए इंस्ट्रक्टर को भी नियुक्त किया है जिनकी देखरेख में स्थानीय कारीगरों को लोइयां बनाने, गुणवत्ता बनाए रखने और उत्पादन से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाएगा।
इससे क्षेत्र के लोगों को पारंपरिक हुनर को रोजगार में बदलने का अवसर मिलने की उम्मीद है। लोइयां सेंटर की शुरुआत को स्थानीय पारंपरिक कला को संरक्षित करने और इसे व्यावसायिक स्तर पर आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
💡 पृष्ठभूमि (Background)
सिरमौर के पारंपरिक परिधान लोइया को जुलाई 2026 में जीआई टैग मिला, जिससे इसकी सांस्कृतिक पहचान और आर्थिक मूल्य दोनों बढ़े। इस खबर में बताया गया है कि जीआई टैग मिलने के बाद जिले मेंनलोईयां के नौहराधार बांदल में पहला लोइयां सेंटर खुला है, जिसे खादी व ग्रामोद्योग बोर्ड ने शुरू किया है। यह पहल लोइया के उत्पादन को संरक्षित करने के साथ-साथ स्थानीय लोगों को प्रशिक्षण देकर रोजगार सृजन का मार्ग प्रशस्त करती है। परिणामस्वरूप, ग्रामीण युवाओं को नई कौशल प्राप्त होगी, आय में वृद्धि होगी और क्षेत्र की सांस्कृति