जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्रों को मजबूत बनाएं, निर्बाध संचालन सुनिश्चित करें : मंत्री श्री कुशवाहा
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मंत्री श्री कुशवाहा ने डीडीआरसी में रिक्त पदों की पूर्ति के लिए आवश्यक कार्यवाही करने तथा जिलों से समन्वय बढ़ाने के निर्देश दिए। प्रदेश के 51 जिलों में जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र हैं। वित्तीय वर्ष 2024-25 में 38 और वर्ष 2025-26 में 37 केंद्रों के प्रस्ताव भारत सरकार को भेजे गए हैं। केंद्रों के मानव संसाधन, कार्यों और गतिविधियों की निगरानी के लिए ऑनलाइन प्रणाली विकसित की जा रही है। उन्होंने सभी संस्थानों में सतत् निगरानी के लिए CCTV कैमरे लगाए जाने के निर्देश दिये।
आयुक्त सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण के.जी. तिवारी ने बताया कि प्रदेश में संचालित 89 वृद्धाश्रमों में 2,423 वरिष्ठजन निवासरत हैं। केंद्रीय अनुदान से 22 जिलों में 31 नशामुक्ति केंद्र संचालित हैं। देवास, शिवपुरी और श्योपुर में नए केंद्रों के प्रस्ताव भारत सरकार को भेजे गए हैं। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह एवं निकाह वित्तीय वर्ष 2026-27 में कन्या विवाह योजना से अब तक 12,523 हितग्राही लाभान्वित हुए हैं और 68.87 करोड़ रुपये व्यय किए गए हैं।
निकाह योजना में 315 हितग्राहियों पर 1.73 करोड़ रुपये व्यय हुए हैं। मुख्यमंत्री कल्याणी विवाह सहायता योजना में 413 तथा मुख्यमंत्री दिव्यांग विवाह प्रोत्साहन योजना में 700 हितग्राही लाभान्वित हुए हैं। उन्होंने बताया कि दिव्यांग विद्यार्थियों की शिक्षा प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत लैपटॉप एवं मोटराइज्ड ट्राइसिकल वितरण राशि 35 हजार प्रति हितग्राही से बढ़ाकर 50 हजार कर दी गई है।
योजना के आवेदन प्राप्त करने की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर है। उन्होंने बताया कि पेंशन योजनाओं में 56 लाख 54 हजार 579 हितग्राहियों को प्रतिमाह लगभग 339.23 करोड़ रुपये की राशि प्रतिमाह सिंगल क्लिक के माध्यम से हितग्राही को स्थान्तरित की जा रही है। प्रदेश के सात जिलों झाबुआ, उमरिया, पांढुर्णा, बुरहानपुर, मऊगंज, अलीराजपुर, बड़वानी में वरिष्ठ जन आश्रम प्रारंभ करने किए जाएंगे इसके प्रस्ताव तैयार किए गये है।
🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत
दिव्यांग पुनर्वास केंद्रों को मजबूत बनाना समाज की समावेशिता का प्रतीक है। जब हर व्यक्ति को समान अवसर और सहायता मिलती है, तो हम एक स्वस्थ, सहानुभूतिपूर्ण समाज का निर्माण करते हैं। यह पहल हमें याद दिलाती है कि हर जीवन की गरिमा का सम्मान करना हमारी ज़िम्मेदारी है। आइए हम सभी मिलकर ऐसे केंद्रों को सशक्त बनाएं, ताकि हर दिव्यांग व्यक्ति को सशक्त, स्वतंत्र और सम्मानित जीवन जीने का अधिकार मिले।