जिलों के स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने की तैयारी
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →
सितंबर 02, नई दिल्ली: देश के जिलों में बनने वाले स्थानीय उत्पादों को विदेशी बाजारों तक पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार डिस्ट्रिक्ट्स ऐज एक्सपोर्ट हब्स (डीईएच) पहल पर जोर दे रही है। जनवरी 2026 तक इसके दायरे में 770 से अधिक जिले शामिल हो चुके थे।
सरकार हर जिले की खासियत वाले उत्पादों और सेवाओं की पहचान कर उन्हें वैश्विक बाजार से जोड़ना चाहती है। भारत का कुल वस्तु और सेवा निर्यात वित्त वर्ष 2024-25 में रिकॉर्ड 825.25 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। वित्त वर्ष 2025-26 में इसके 863.11 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।
सरकार अब इस बढ़ते निर्यात का फायदा छोटे शहरों, कस्बों और ग्रामीण इलाकों तक पहुंचाने की कोशिश कर रही है। डीईएच के तहत जिलों के लिए जिला निर्यात कार्ययोजना (डीईएपी) तैयार की जा रही है। मार्च 2026 तक 590 जिलों की कार्ययोजना के मसौदे तैयार हो चुके थे, जिनमें से 249 को जिला निर्यात संवर्धन समितियों ने मंजूरी दी थी।
यह पहल ‘एक जिला, एक उत्पाद’ की अवधारणा से जुड़ी है। इसके तहत जीआई टैग वाले उत्पादों, कृषि और खिलौना क्लस्टरों तथा इंजीनियरिंग सामान की निर्यात क्षमता पहचानी जा रही है।
गुजरात के साबरकांठा के सिरेमिक, टाइल और आलू, महाराष्ट्र के जलगांव के केला और भरित बैंगन, मध्य प्रदेश के आगर मालवा के संतरे, छत्तीसगढ़ के बस्तर के लौह शिल्प और कृषि उत्पाद तथा झारखंड के जामताड़ा के बांस शिल्प और काजू इसके उदाहरण हैं।
सरकार स्थानीय कारोबारियों को गुणवत्ता मानक, परीक्षण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और प्रमाणन की जानकारी देने के साथ निर्यात प्रक्रिया आसान बनाने पर भी काम कर रही है। ई-कॉमर्स, लॉजिस्टिक्स कंपनियों और डाक घर निर्यात केंद्रों के जरिये छोटे कारोबारियों को विदेशी बाजार तक पहुंचाने की कोशिश है।
1 जून 2026 से डीईएच में परिणाम आधारित और चरणबद्ध तरीके पर जोर दिया गया है। नए निर्यातकों का पंजीकरण बढ़ाना, सरकारी योजनाओं का बेहतर तालमेल और एमएसएमई व जीआई उत्पादों का निर्यात बढ़ाना इसके प्रमुख लक्ष्य हैं। सरकार को उम्मीद है कि इससे निर्यात के साथ स्थानीय कारोबार, निवेश और रोजगार भी बढ़ेंगे।