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जिंदा पोते का डेथ सर्टिफिकेट या मृत बच्चे का आधार:महोबा में बेशकीमती जमीन को लेकर दादा-दादी और बहू आमने-सामने, SDM ने टीम गठित की

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 18 अगस्त 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
जिंदा पोते का डेथ सर्टिफिकेट या मृत बच्चे का आधार:महोबा में बेशकीमती जमीन को लेकर दादा-दादी और बहू आमने-सामने, SDM ने टीम गठित की

महोबा शहर में सवा बीघा बेशकीमती जमीन को लेकर एक ऐसा पारिवारिक विवाद सामने आया है, जिसने दस्तावेजों की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ दादा ने आरोप लगाया है कि बहू ने अपने भाइयों के साथ मिलकर जीवित 7 साल के पोते का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवा लिया, ताकि जमीन को बेचा जा सके। दूसरी तरफ मां का दावा है कि मृत्यु प्रमाण पत्र उसके उसी बेटे का है, जिसकी करीब सात माह की उम्र में वर्ष 2019 में मौत हो चुकी थी। महिला ने उल्टा सास-ससुर और जेठ पर जीवित बेटे के आधार कार्ड में नाम बदलकर मृत बेटे का नाम दर्ज कराने का आरोप लगाया है। दोनों पक्षों की शिकायतें और एक-दूसरे पर लगाए गए आरोप सामने आने के बाद मामला एसडीएम महोबा तक पहुंचा। प्रशासन ने अब जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, आधार में हुए बदलाव और जमीन के रिकॉर्ड की जांच के लिए विशेष टीम गठित कर दी है। मामला महोबा शहर के महतवनापुरा मोहल्ले में आईटीआई कॉलेज के पास स्थित करीब सवा बीघा जमीन से जुड़ा है। जमीन की कीमत काफी अधिक बताई जा रही है। इसी संपत्ति को लेकर परिवार के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। मृतक हरीश कुमार चौरसिया के पिता कुंवर बहादुर चौरसिया ने एसडीएम से शिकायत की। उन्होंने अपनी बहू रजनी और उसके भाइयों पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि बहू ने जमीन पर कब्जा या उसे बेचने के मकसद से अपने 7 साल के जीवित पोते के नाम मृत्यु प्रमाण पत्र बनवा दिया। शिकायत सामने आने के बाद मामला केवल जमीन के विवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सरकारी दस्तावेजों में कथित गड़बड़ी के आरोपों तक पहुंच गया। दादा बोले- जिंदा पोते को कागजों में मार दिया, जमीन बेचने की तैयारी कुंवर बहादुर चौरसिया का आरोप है कि उनका पोता जीवित है, लेकिन उसके नाम पर मृत्यु प्रमाण पत्र बनवा दिया गया। उनका दावा है कि इस दस्तावेज का इस्तेमाल जमीन से जुड़े अधिकार खत्म करने या संपत्ति को बेचने के लिए किया जा सकता था। शिकायत के बाद प्रशासन के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस बच्चे को परिवार जीवित बता रहा है, उसके नाम से मृत्यु प्रमाण पत्र कैसे जारी हुआ और उसमें दर्ज जानकारी किस आधार पर तैयार की गई। दादा की शिकायत के बाद जब बहू रजनी अपने भाइयों के साथ तहसील पहुंचीं तो उन्होंने पूरे आरोप को ही गलत बताया। रजनी देवी ने आरोपों को खारिज करते हुए बताया कि 7 जनवरी 2026 को जारी हुआ मृत्यु प्रमाण पत्र उनके बड़े बेटे पुष्पराज का है। उनके मुताबिक पुष्पराज की 3 मार्च 2019 को महज 7 माह की उम्र में मृत्यु हो गई थी। उनका कहना है कि इसलिए जीवित बच्चे का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने का आरोप गलत है। रजनी ने विवाद की दूसरी कहानी बताते हुए कहा कि उनके पति हरीश कुमार की वर्ष 2020 में मौत हो गई थी। उनका आरोप है कि पति की बीमारी का फायदा उठाकर सास-ससुर और जेठ ने पूरी सवा बीघा जमीन मृत बेटे पुष्पराज के नाम वसीयत करवा ली थी। रजनी का दावा है कि जब जमीन को बेचने की कोशिश सफल नहीं हुई तो दूसरे जीवित बेटे युवांश के दस्तावेजों में कथित तौर पर हेरफेर किया गया। मां का पलटवार- जीवित युवांश के आधार में बदल दिया मृत भाई का नाम रजनी के भाई रवि चौरसिया का आरोप है कि युवांश के स्कूल रिकॉर्ड, बैंक पासबुक, राशन कार्ड और दूसरे ऑनलाइन दस्तावेजों में आज भी उसका नाम युवांश ही दर्ज है। उनका दावा है कि वर्ष 2020 से 2026 तक बच्चे के आधार कार्ड में भी युवांश नाम दर्ज था, लेकिन हाल में उसमें बदलाव कर नाम पुष्पराज कर दिया गया। परिवार का विवाद अब इस सवाल पर आकर टिक गया है कि आखिर दस्तावेजों में सही नाम कौन सा है और किस रिकॉर्ड में कब बदलाव हुआ। एक पक्ष जहां जीवित बच्चे का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने का आरोप लगा रहा है, वहीं दूसरा पक्ष जीवित बच्चे के आधार में मृत भाई का नाम दर्ज कराने की बात कह रहा है। दोनों पक्षों के आरोपों की सच्चाई दस्तावेजों की जांच के बाद ही सामने आएगी। फिलहाल प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। SDM ने बनाई जांच टीम, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र से खतौनी तक खंगाली जाएगी दोनों पक्षों की शिकायत और एक-दूसरे के विरोधाभासी दावों को देखते हुए एसडीएम शिव ध्यान पांडे ने मामले में जांच टीम गठित की है। टीम नगर पालिका के जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्रों के रिकॉर्ड की जांच करेगी। इसके साथ ही आधार कार्ड में हुए बदलाव, बच्चे के अन्य सरकारी और शैक्षिक दस्तावेज तथा जमीन की खतौनी भी जांच के दायरे में रहेगी। प्रशासन यह पता लगाने की कोशिश करेगा कि मृत्यु प्रमाण पत्र किस आधार पर जारी हुआ, उसमें दर्ज बच्चे की पहचान किस रिकॉर्ड से मिलाई गई और आधार कार्ड में नाम बदलने की प्रक्रिया कब और किस स्तर पर हुई। एसडीएम का कहना है कि जांच में सामने आने वाले वास्तविक तथ्यों को रिकॉर्ड में शामिल किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर इन्हें अदालत के समक्ष भी रखा जाएगा। प्रशासन का उद्देश्य दस्तावेजों की जांच के आधार पर सही स्थिति सामने लाना है, ताकि वास्तविक पीड़ित को न्याय मिल सके।

📡 स्रोत: NewsData.io

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