ज्ञानेश कुमार के खिलाफ शिकायत दर्ज, महुआ मोइत्रा ने कहा- 'आपराधियों वाले काम...'
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टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने गुरुवार (24 सितंबर 2026) को संसद स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है.
शिकायत में उन्होंने द इंडियन एक्सप्रेस की उस खबर का जिक्र किया, जिसके मुताबिक निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और निर्वाचन आयुक्त विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में निर्वाचन आयोग के फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार औपचारिक रूप से आपत्ति जताई थी.
उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में हेरफेर किया है.
उन्होंने दावा किया कि ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग आईटी प्रणाली ने वोटर लिस्ट के रखरखाव के लिए जिम्मेदार स्थानीय अधिकारियों को दरकिनार कर दिया था.
न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस ने अभी तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की है.
महुआ मोइत्रा ने कहा कि चीफ इलेक्शन कमीशन के पास अपने दोनों सहयोगियों की दर्ज राय के खिलाफ आयोग की ओर से कोई भी कदम उठाने का अधिकार नहीं है और न ही उनके पास आयोग के नाम से ऐसे संदेश जारी करने का कोई अधिकार है जिन्हें आयोग ने कभी मंजूरी न दी हो.
उन्होंने एसआईआर प्रक्रिया के लिए काफी धनराशि मंजूर और जारी किए जाने के बीच सरकारी धन के गलत इस्तेमाल का सवाल भी उठाया.
CEC ज्ञानेश कुमार पर महुआ मोइत्रा का निशाना
TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा, 'मैं आज संसद मार्ग पुलिस स्टेशन में भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने आई हूं, जिन्होंने आपराधियों वाले काम किए हैं.
आपराधिक काम क्या है? चुनाव आयोग में तीन चुनाव आयुक्त होते हैं ताकि कामकाज में संतुलन बना रहे. बहुमत से लिए गए फैसले ही लागू होते हैं.'
VIDEO | TMC MP Mahua Moitra says, "I have come today to the Parliament Street Police Station to file a complaint against Gyanesh Kumar, the Chief Election Commissioner of India, who has indulged in criminal conduct.
What is the criminal conduct?
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📡 स्रोत: ABP Live
💡 पृष्ठभूमि (Background)
यह खबर एक सांसद द्वारा चुनाव आयुक्त के खिलाफ शिकायत दर्ज करने के बारे में है। महुआ मोइत्रा ने संसद स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ शिकायत दायर की, जिसमें उन्होंने द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें बताया गया कि पूर्व निर्वाचन आयुक्तों ने पिछले दस महीनों में आयोग के निर्णयों पर बार-बार आपत्ति जताई थी। यह घटना चुनावी प्रक्रियाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठाती है, जिससे जनता का विश्वास प्रभावित हो सकता है। यदि शिकायत वैध साबित होती है तो यह निर्वाचन आयोग के