जुन्गा बटालियन में आमजन को भी मिलेगी आपातकालीन चिकित्सा सुविधा: भूपेन्द्र नेगी
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12 बेड की इमरजेंसी मेडिकल यूनिट और दो बेड का विशेष वार्ड, स्थानीय लोगों को भी मिलेगा निःशुल्क उपचार
सितंबर 19, शिमला (हिमाचल प्रदेश): प्रथम हिमाचल प्रदेश सशस्त्र पुलिस बटालियन, जुन्गा में जनसेवा की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल की गई है। बटालियन परिसर में 12 बिस्तरों वाली आपातकालीन विशेष चिकित्सा देखभाल इकाई का शुभारंभ वयोवृद्ध वरिष्ठ नागरिक मालती नेगी ने किया। इसके अतिरिक्त इस यूनिट में दो बिस्तरों वाले विशेष वार्ड की भी सुविधा रहेगी।
इस नई चिकित्सा इकाई में महिलाओं के लिए चार और पुरुषों के लिए आठ बिस्तर निर्धारित किए गए हैं। इससे अब बटालियन के अधिकारियों और कर्मचारियों को परिसर में ही आवश्यकता के अनुसार इनडोर एवं आपातकालीन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। समादेशक भूपेन्द्र सिंह नेगी ने कहा कि नई चिकित्सा सुविधा केवल बटालियन तक सीमित नहीं रहेगी।
आवश्यकता पड़ने पर जुन्गा क्षेत्र के स्थानीय निवासियों और आसपास की पंचायतों के लोगों को भी इसका लाभ मिलेगा। दुर्घटना, आपदा अथवा अन्य आपात परिस्थितियों में आम जनता को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध करवाने के साथ-साथ निःशुल्क एंबुलेंस और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवाने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि आपात स्थिति में समय पर चिकित्सा सहायता मिलना बेहद महत्वपूर्ण है। बटालियन की यह सुविधा स्थानीय लोगों के लिए मददगार साबित होने के साथ सिविल अस्पताल जुन्गा पर पड़ने वाले दबाव को कम करने में भी सहायक होगी। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश पुलिस जनता की सेवा के लिए प्रतिबद्ध है और बटालियन भविष्य में भी जनहित से जुड़े कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाती रहेगी।
गौरतलब है कि इस इकाई की स्थापना से पहले बटालियन परिसर में कर्मचारियों के लिए इनडोर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं थी। अब परिसर में ही मरीजों को आवश्यकता के अनुसार उपचार और निगरानी की सुविधा मिल सकेगी। स्थानीय लोगों ने बटालियन की इस पहल की सराहना करते हुए इसे जुन्गा क्षेत्र के लिए उपयोगी और जनहितकारी कदम बताया।
इस अवसर पर स्थानीय पंचायत प्रतिनिधि, व्यापार मंडल के सदस्य, फोरेंसिक प्रयोगशाला के विशेषज्ञ, पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी तथा बटालियन के चिकित्सक मौजूद रहे।
🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत
जुन्गा बटालियन की यह पहल हमें याद दिलाती है कि सेवा का सच्चा अर्थ है – ज़रूरतमंदों की सहायता। जब किसी को आपातकाल में मदद मिलती है, तो समाज की एकजुटता दिखती है। इसी भावना से हम सभी को चाहिए कि छोटी‑छोटी दुविधाओं को शांतिपूर्ण संवाद से सुलझाएँ, और जब किसी को सहायता की ज़रूरत हो तो हाथ बढ़ाएँ। इस कदम से प्रेरित होकर हम भी समाज में सहानुभूति और सहयोग की संस्कृति को बढ़ावा दें।