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Juvenile को सजा देते समय एडल्ट की तरह देखा जाना चाहिए? मेघना गुलजार ने टाल दिया सवाल

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 31 अगस्त 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
Juvenile को सजा देते समय एडल्ट की तरह देखा जाना चाहिए? मेघना गुलजार ने टाल दिया सवाल

मेघना गुलजार की आने वाली फिल्म दायरा का ट्रेलर रिलीज होते ही चर्चा में आ गया है. फिल्म का ट्रेलर सिर्फ एक अपराध की कहानी नहीं दिखाता, बल्कि किशोर अपराध, कानून और न्याय व्यवस्था को लेकर कई ऐसे सवाल खड़े करता है, जिनका जवाब आसान नहीं है.

कहानी एक रेप केस के इर्द-गिर्द घूमती है, जहां एक मां अपनी बेटी के लिए न्याय की लड़ाई लड़ती दिखाई देती है. वहीं पुलिस अधिकारियों के न्याय को लेकर अलग-अलग नजरिए कहानी को और गंभीर बना देते हैं. ज्यूडिशियल सिस्टम के सवाल पर नहीं दिया जवाब

ट्रेलर में एक जगह सवाल उठाया जाता है कि अगर कोई Juvenile रेप और मर्डर जैसा गंभीर अपराध कर सकता है, तो फिर उसे कानून के तहत विशेष संरक्षण क्यों मिलना चाहिए? यही सवाल फिल्म के ट्रेलर को लेकर दर्शकों के बीच बहस का कारण भी बन गया है.

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ट्रेलर लॉन्च के दौरान इसी मुद्दे को लेकर ABP की रिपोर्टर निरमा पुरोहित ने फिल्म मेकर्स से सवाल किया. रिपोर्टर ने 16 साल की लड़की से जुड़े कथित गैंगरेप जैसे मामलों और निर्भया केस का संदर्भ देते हुए पूछा कि क्या रेप जैसे जघन्य अपराध करने वाले Juvenile को सजा देते समय एडल्ट की तरह देखा जाना चाहिए?

साथ ही यह भी सवाल किया गया कि अगर Judicial System में कोई लूपहोल है, तो क्या उसमें बदलाव की जरूरत है? हालांकि, रिपोर्टर अपना सवाल पूरी तरह खत्म कर पातीं, उससे पहले ही मेघना गुलजार ने बीच में हस्तक्षेप किया.

उन्होंने कहा कि यह एक Philosophical और Judicial सवाल है और ऐसे सवालों पर हर व्यक्ति का अपना नजरिया हो सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि इस मंच पर बातचीत को फिल्म तक सीमित रखना बेहतर होगा. <img src="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/

📡 स्रोत: ABP Live Film

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