कचरे के ढेर से बनी ‘अशोक वाटिका’, हजारीबाग में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की मिसाल
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हजारीबाग के कन्हरी अशोक नगर में कचरे के ढेर को स्थानीय लोगों और युवाओं ने गार्डन में बदला, ‘अशोक वाटिका’ स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का दे रही संदेश।
Short Headline: कचरे के ढेर से बनी ‘अशोक वाटिका’, हजारीबाग में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की मिसाल
अशोक वाटिका हजारीबाग, नितेश
कचरा हटाया, पौधे लगाए, गार्डन बनाया जहां था कचरा, वहां अब खिली हरियाली
कचरे के ढेर को गार्डन में बदला अशोक वाटिका बनी स्वच्छता की मिसाल
स्वच्छता के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश
एंकर हजारीबाग के कन्हरी अशोक नगर में कचरे के ढेर को खूबसूरत गार्डन में बदलकर स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया है। कभी जहां कचरा फेंका जाता था, आज वहां पेड़-पौधों से सजी ‘अशोक वाटिका’ लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक कर रही है। स्थानीय लोगों और युवाओं की इस पहल को शहर के लिए एक प्रेरणादायक कदम माना जा रहा है।
होल्ड अप साउंड रिपोर्ट
वीओ 1 कभी कचरे का ढेर और असामाजिक गतिविधियों का अड्डा रही यह जगह आज खूबसूरत गार्डन में तब्दील हो चुकी है। हजारीबाग के कन्हरी अशोक नगर में स्थानीय लोगों ने इस जगह को नया रूप देकर ‘अशोक वाटिका’ नाम दिया है। इस पहल के बारे में देव प्रताप बताते हैं कि स्वच्छता अभियान और वन्य प्राणी संरक्षण की सोच के साथ तैयार की गई यह वाटिका अब लोगों को साफ-सफाई और पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित कर रही है।
बाइट- देव प्रताप, वाइल्डलाइफ रेस्क्यू ग्रूप, हजारीबाग
वीओ 2 अशोक वाटिका को तैयार करने में लोगों ने मिलकर योगदान दिया है। साथ ही इस बदलाव में वाइल्डलाइफ रेस्क्यू ग्रुप की भी अहम भूमिका रही। यह बदलाव न सिर्फ आसपास के लोगों के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि पूरे हजारीबाग के लिए स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की एक मिसाल भी बन रहा है। शिक्षक सुरेंद्र प्रसाद ने भा पर्यावरण संरक्षण की इसी जरूरत पर जोर देते हैं।
बाइट- सुरेंद्र प्रसाद, शिक्षक
वीओ 3 स्थानीय युवाओं के लिए भी अशोक वाटिका का यह बदलाव प्रेरणा देने वाला है। पर्यावरण संरक्षण आज सिर्फ एक अभियान नहीं, बल्कि समय की जरूरत बन चुका है। ग्लोबल वार्मिंग के साथ जल और वायु प्रदूषण जैसी चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे स्थानीय युवा बताते हैं कि पेड़-पौधों को बचाना और अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है।
बाइट- स्थानीय
अंतिम वीओ ‘एक पेड़ मां के नाम’ और स्वच्छता अभियान से प्रेरणा लेकर शुरू की गई यह पहल बताती है कि इच्छाशक्ति हो तो कचरे के ढेर को भी खूबसूरत और उपयोगी जगह में बदला जा सकता है।
हजारीबाग से नितेश कुमार की रिपोर्ट।